देहरादून | 6 अप्रैल 2026
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में दो साल पहले हुए हिट एंड रन मामले में एक मां के संघर्ष ने नई मिसाल कायम की है। पुलिस से उम्मीद टूटने के बाद मां ने खुद ही जांच की जिम्मेदारी उठाई और आखिरकार उस ट्रक का पता लगा लिया, जिसने उसके बेटे की जान ली थी। अब नए सबूत मिलने के बाद मामले में दोबारा जांच शुरू होने जा रही है।
16 फरवरी 2024 को हुआ था हादसा
पीड़िता ललिता चौधरी के अनुसार, 16 फरवरी 2024 को उनके बेटे क्षितिज चौधरी को प्रेमनगर क्षेत्र में एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया, जबकि घायल क्षितिज करीब 45 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा।
बाद में एंबुलेंस के जरिए उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसका एक पैर काटना पड़ा। गंभीर हालत के चलते 17 फरवरी 2024 को उसकी मौत हो गई।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं की। रिपोर्ट दर्ज करने में भी देरी की गई और जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। अंततः पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस को बंद कर दिया।
इससे निराश होकर मां ललिता चौधरी ने खुद ही अपने बेटे को न्याय दिलाने का संकल्प लिया और जांच में जुट गईं।
सीसीटीवी खंगाले, आरटीओ तक पहुंची मां
ललिता चौधरी ने पिछले दो वर्षों में आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, सड़कों का बार-बार निरीक्षण किया और आरटीओ कार्यालय जाकर ट्रकों से जुड़े नंबरों की जानकारी जुटाई।
लगातार प्रयास और धैर्य के बाद उन्होंने उस ट्रक की पहचान कर ली, जिसने हादसे को अंजाम दिया था। उनकी जांच में सामने आया कि ट्रक का नंबर UK07CB6929 है, जो अंकित चौहान के नाम पर पंजीकृत बताया जा रहा है।
अब फिर खुलेगा केस, होगी अग्रिम विवेचना
पीड़िता ने नए सबूतों के साथ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर मामले की पुनः जांच की मांग की। एसएसपी के आश्वासन के बाद प्रेमनगर थाने में दोबारा प्रार्थनापत्र लेकर केस की जांच प्रक्रिया शुरू की गई है।
प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर ने बताया कि मामले में पहले फाइनल रिपोर्ट लग चुकी थी, लेकिन नए साक्ष्य सामने आने के बाद अब अग्रिम विवेचना शुरू की जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत यदि किसी बंद मामले में नए सबूत मिलते हैं या जांच में कोई महत्वपूर्ण पहलू छूट जाता है, तो दोबारा जांच कर सच्चाई तक पहुंचना संभव होता है।
मां की मांग: दोषियों को मिले सख्त सजा
ललिता चौधरी का कहना है कि अगर शुरुआत में ही पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती तो आरोपी अब तक जेल में होता। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष
देहरादून का यह मामला न सिर्फ एक हिट एंड रन केस है, बल्कि एक मां के अटूट हौसले और न्याय के लिए उसके संघर्ष की कहानी भी है। दो साल की मेहनत के बाद सामने आए सबूत अब यह तय करेंगे कि दोषियों को कब और कैसे सजा मिलती है। यह घटना पुलिस व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करती है, वहीं यह भी दिखाती है कि सच की तलाश में दृढ़ संकल्प कितना महत्वपूर्ण होता है।


