BREAKING

धधकती लपटों के बीच अब सुरक्षित रहेंगे ‘वनवीर’, 7,190 वनकर्मियों को मिलेंगे अग्निरोधी सूट और विशेष किट, हर फायर वाचर का 10 लाख का बीमा

देहरादून | 1 मार्च 2026

उत्तराखंड के जंगलों में आग से जूझने वाले वनकर्मियों के लिए राहत भरी खबर है। अब धधकती लपटों के बीच जान जोखिम में डालकर ड्यूटी निभाने वाले ‘वनवीरों’ को अग्निरोधी सूट और विशेष सुरक्षा किट उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार और वन विभाग ने फील्ड स्टाफ की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह अहम निर्णय लिया है।

1438 क्रू-स्टेशन के 7,190 कर्मियों को मिलेगा सुरक्षा कवच

प्रदेश के 1438 क्रू-स्टेशन में तैनात कुल 7,190 वनकर्मियों को यह विशेष किट प्रदान की जा रही है। विभागीय जानकारी के अनुसार अब तक करीब 2,500 कर्मियों को किट वितरित की जा चुकी है, जबकि मार्च 2026 के अंत तक सभी वनकर्मियों को यह सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

71.05 प्रतिशत वन भूभाग वाले उत्तराखंड में हर वर्ष ग्रीष्मकाल के दौरान बड़े पैमाने पर वनाग्नि की घटनाएं सामने आती हैं। इन घटनाओं में न केवल बहुमूल्य वन संपदा नष्ट होती है, बल्कि आग बुझाने के दौरान कई वनकर्मी भी घायल हो चुके हैं। ऐसे में लंबे समय से उनकी सुरक्षा के लिए आधुनिक उपकरणों की मांग उठ रही थी।

सूती वर्दी से अग्निरोधी सूट तक का सफर

अब तक वनकर्मी सूती या नायलॉन की सामान्य वर्दी में ही आग बुझाने का कार्य करते थे, जो अत्यंत जोखिमपूर्ण था। भीषण गर्मी और तेज लपटों के सामने यह वर्दी सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम नहीं थी। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने इस बार सुरक्षा मानकों में बड़ा बदलाव किया है।

मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन) सुशांत पटनायक ने बताया कि नई विशेष किट में अग्निरोधी सूट के साथ हेल्मेट, विशेष मौजे, फायर फाइटिंग बूट, दस्ताने और पानी की बोतल शामिल हैं। अग्निरोधी सूट को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह तेज गर्मी और लपटों के सीधे प्रभाव को सहन कर सके, साथ ही पहाड़ी ढलानों पर चढ़ते-उतरते समय अतिरिक्त वजन का अहसास न हो।

गढ़वाल और कुमाऊं में तैनात होंगे 5,623 फायर वाचर

आगामी फायर सीजन को देखते हुए गढ़वाल मंडल में 3,003 और कुमाऊं मंडल में 2,620 फायर वाचरों की तैनाती की जाएगी। इन सभी फायर वाचरों का 10 लाख रुपये का सामूहिक जीवन बीमा कराया जाएगा।

मुख्य वन संरक्षक पटनायक के अनुसार, इस संबंध में सभी वन प्रभागों के डीएफओ को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि समय रहते बीमा और सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जा सकें।

निष्कर्ष

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और वनसमृद्ध राज्य में वनाग्नि एक गंभीर चुनौती है। ऐसे में जंगलों और जैव विविधता की रक्षा करने वाले वनकर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अग्निरोधी सूट, आधुनिक किट और बीमा कवच जैसे कदम न केवल उनके मनोबल को मजबूत करेंगे, बल्कि आपदा प्रबंधन की क्षमता को भी सशक्त बनाएंगे।

अब उम्मीद की जा रही है कि सुरक्षित ‘वनवीर’ और मजबूत व्यवस्थाओं के साथ उत्तराखंड वनाग्नि की चुनौती का और प्रभावी ढंग से सामना कर सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *