उत्तराखंड के लोकेशनों से जुड़ी हैं अभिनेता की अनमोल यादें
तिथि: 23 नवंबर 2025
स्थान: विकासनगर, देहरादून (उत्तराखंड)
धर्मेंद्र के निधन के बाद देहरादून में गूँजी पुरानी यादें
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन ने पूरे देश के साथ उत्तराखंड के लोगों को भी गमगीन कर दिया है। उनका खास लगाव देहरादून के पछवादून और जौनसार-बावर क्षेत्र से रहा था, जहां उनकी सुपरहिट फिल्म ‘आदमी और इंसान’ (1969) के कई दृश्य शूट किए गए थे। स्थानीय लोग आज भी उस दौर को याद करते हुए भावुक हो उठते हैं।
डाकपत्थर बैराज और कोटी कालोनी बने थे फिल्म के मुख्य लोकेशन
वर्ष 1969 में धर्मेंद्र और सायरा बानो देहरादून पहुंचे थे।
यहां डाकपत्थर बैराज पुल, ग्रीन पार्क, टोंस नदी किनारा, और कोटी कालोनी के प्रसिद्ध फील्ड हॉस्टल शीशमहल में फिल्म के महत्वपूर्ण दृश्य शूट किए गए थे।
हिट हुआ था डाकपत्थर में फिल्माया गया गीत
फिल्म के दौरान फिल्माया गया मशहूर गीत—
“जागेगा इंसान ज़माना देखेगा, उठेगा तूफान ज़माना देखेगा…”
डाकपत्थर बैराज पुल के पास फिल्माया गया था और उस समय यह गीत बेहद लोकप्रिय हुआ था।
तीन दिन रुके थे ‘शीशमहल’ फील्ड हॉस्टल में
शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र व सायरा बानो तीन दिन कोटी कालोनी स्थित फील्ड हॉस्टल में ठहरे थे।
यह वही भवन है जो 1965 में कोटी–इच्छाड़ी जल विद्युत परियोजना के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के ठहरने के लिए बनाया गया था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अभिनेता अक्सर हॉस्टल से बाहर निकलकर टोंस नदी के किनारे टहलते थे।
टोंस किनारे और कोटी कालोनी में कई दृश्य फिल्माए गए
फिल्म की कई शूटिंग लोकेशन—
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टोंस नदी का किनारा
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कोटी कालोनी के घने जंगल
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शीशमहल के आसपास के क्षेत्र
—आज भी उन यादों को संजोए हुए हैं।
धर्मेंद्र का उत्तराखंड से पुराना रिश्ता
अभिनेता ने कई इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें पहाड़ी क्षेत्र की शांति और खूबसूरती बेहद पसंद थी।
स्थानीय लोग अब भी बताते हैं कि धर्मेंद्र यहां के लोगों से घुलमिल जाते थे और गांवों में घूमने में उन्हें खास आनंद आता था।
प्रशंसकों में शोक की लहर
उनके निधन की खबर जैसे ही देहरादून और विकासनगर क्षेत्र में पहुंची, लोग पुराने किस्से याद कर भावुक हो गए।
डाकपत्थर और कोटी कालोनी के लोग कहते हैं—
“फिल्म की शूटिंग ने हमारे इलाके को पहचान दिलाई थी, धर्मेंद्र जी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।”
निष्कर्ष
धर्मेंद्र केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति से गहरा जुड़ाव रखने वाले एक संवेदनशील कलाकार थे।
डाकपत्थर बैराज, टोंस नदी और शीशमहल में फिल्माई गई उनकी यादें आज भी स्थानीय लोगों के दिलों में ताज़ा हैं।
उनका जाना हिंदी सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति है, पर उनके द्वारा छोड़ी गई यादें हमेशा उत्तराखंड की धरती पर जीवित रहेंगी।




