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धामी सरकार का सुशासन रिकॉर्ड: ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ से एक दिन में 7,876 नागरिकों तक पहुंच, जनता–प्रशासन की दूरी घटी

देहरादून | 22 जनवरी 2026

उत्तराखंड में सुशासन को व्यवहार में उतारने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रहा ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान एक सशक्त और प्रभावी प्रशासनिक मॉडल बनकर उभरा है। इस अभियान के तहत एक ही दिन में 7,876 नागरिकों तक पहुंच बनाकर सरकार ने नया रिकॉर्ड कायम किया है, जिससे शासन की सक्रियता और जनसरोकार स्पष्ट रूप से सामने आए हैं।


इस अभियान का उद्देश्य आमजन को उनके द्वार पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मंगलवार को राज्यभर में आयोजित शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया, जिससे यह साबित हुआ कि जनता सरकार की इस पहल को भरोसे और उम्मीद के साथ अपना रही है।


प्रदेश के सभी जिलों में अब तक इस अभियान के तहत कुल 408 जनसेवा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। केवल एक दिन में 13 नए शिविरों का आयोजन किया गया, जो सरकार की तेज़ कार्यशैली और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इन शिविरों के माध्यम से अब तक 3,30,461 नागरिकों ने सीधे सहभागिता की है।


अभियान के दौरान अब तक 33,529 शिकायतें और प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22,675 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। एक ही दिन में 783 नए आवेदन मिले, जिनमें से 502 मामलों का समाधान मौके पर या संबंधित विभागों के माध्यम से कर दिया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रमाण पत्रों और शासकीय सेवाओं के लिए 43,975 आवेदन भी प्राप्त हुए हैं।


सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ इस अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा है। अब तक 1,79,169 नागरिकों को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जा चुका है, जिनमें 3,911 नए लाभार्थी केवल एक दिन में जुड़े हैं। इससे यह स्पष्ट है कि योजनाएं कागज़ों तक सीमित न रहकर जमीन पर उतर रही हैं।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही, संवेदनशीलता और पारदर्शिता का प्रतीक है। उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार आमजन की समस्याओं के समाधान और सेवाओं की सुगमता के लिए इस अभियान को निरंतर मजबूती के साथ आगे बढ़ाती रहेगी।


निष्कर्ष:
धामी सरकार का यह अभियान न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण बन रहा है, बल्कि जनता और सरकार के बीच भरोसे की मजबूत कड़ी भी स्थापित कर रहा है। एक दिन में हजारों नागरिकों तक पहुंच बनाकर इस पहल ने साबित कर दिया है कि सुशासन तभी सार्थक होता है, जब सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचे।

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