स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तिथि: 2 अप्रैल 2026
उत्तराखंड के विद्यालयों में शिक्षा को अधिक समृद्ध और प्रेरणादायक बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अब प्रदेश के सभी सरकारी, अशासकीय और निजी विद्यालयों में प्रत्येक शनिवार को छात्रों को देश और विशेष रूप से उत्तराखंड के गौरवशाली राजाओं के इतिहास से अवगत कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने इस कार्यक्रम को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस पहल के तहत छात्रों को वसुदेव कत्यूरी, कनकपाल, अजयपाल, प्रद्युम्न शाह, सोमचंद और ज्ञानचंद जैसे महान शासकों की वीरता, साहस और योगदान के बारे में जानकारी दी जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को जारी निर्देशों में कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है। इस नीति में शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि छात्र-छात्राएं केवल जानकारी ही नहीं बल्कि मूल्य, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रबोध भी विकसित कर सकें।
इस कार्यक्रम के तहत कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक शनिवार को समय-सारणी के अंतिम सत्र में 30 मिनट का विशेष वाचन सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें इतिहास को रोचक और सरल तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि छात्र इसे बेहतर ढंग से समझ सकें।
गढ़वाल के राजाओं की वीर गाथाएं
गढ़वाल राजवंश के संस्थापक कनकपाल ने 9वीं शताब्दी में पर्वतीय क्षेत्रों में स्थिर शासन स्थापित किया। वहीं 14वीं शताब्दी में राजा अजयपाल ने गढ़वाल के 52 गढ़ों को एकीकृत कर एक सशक्त राज्य की नींव रखी और राजधानी को चांदपुर से देवलगढ़ स्थानांतरित किया।
18वीं शताब्दी में राजा प्रद्युम्न शाह ने गोरखाओं के आक्रमणों का साहसपूर्वक सामना कर राज्य की रक्षा की।
कुमाऊं के शासकों का योगदान
कुमाऊं क्षेत्र में सोमचंद ने चंद वंश की स्थापना की, जिसने लंबे समय तक शासन किया। राजा बाज बहादुर चंद को कुमाऊं के सबसे प्रतापी शासकों में गिना जाता है, जिन्होंने अल्मोड़ा को राजधानी बनाया और राज्य की सीमाओं का विस्तार किया।
वहीं राजा ज्ञानचंद को चंद वंश का अंतिम शक्तिशाली शासक माना जाता है, जिन्होंने प्रशासनिक सुधारों के जरिए राज्य को सुदृढ़ किया।
प्रतियोगिताएं और मूल्यांकन
इस पहल के तहत समय-समय पर स्कूलों में क्विज प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी, जिससे छात्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
निगरानी और क्रियान्वयन
इस कार्यक्रम को इसी सप्ताह से पूरे प्रदेश में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। ब्लॉक स्तर पर उप शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी, जबकि जिला स्तर पर डीईओ और सीईओ इसकी मासिक समीक्षा करेंगे और प्रगति रिपोर्ट निदेशालय को भेजेंगे।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार की यह पहल न केवल छात्रों को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का प्रयास है, बल्कि उन्हें एक जागरूक, जिम्मेदार और संस्कारित नागरिक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इस तरह की शिक्षा से आने वाली पीढ़ी अपने अतीत को समझते हुए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकेगी।


