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‘नस्लीय हिंसा के कोई साक्ष्य नहीं’— एंजेल चकमा मौत मामले में SSP देहरादून का स्पष्ट बयान

देहरादून | 29 दिसंबर 2025

राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में मामला

सेलाकुई में त्रिपुरा निवासी छात्र एंजेल चकमा की मौत का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बीच देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय सिंह ने मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अब तक की जांच में किसी भी प्रकार की नस्लीय हिंसा या भेदभाव के साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।


मारपीट के बाद इलाज के दौरान हुई मौत

एसएसपी ने बताया कि 9 दिसंबर को सेलाकुई क्षेत्र में दो पक्षों के युवकों के बीच विवाद हुआ था, जो बाद में मारपीट में बदल गया। इस घटना में त्रिपुरा निवासी छात्र एंजेल चकमा और उसके भाई माइकल चकमा घायल हुए थे।
एंजेल की हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 दिसंबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।


पांच आरोपी नामजद, एक फरार

पुलिस ने इस मामले में दो नाबालिगों समेत पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

  • तीन आरोपियों को 14 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया

  • दो नाबालिगों को संरक्षण में लिया गया

  • एक नेपाल निवासी आरोपी घटना के बाद से फरार है, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है
    फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें नेपाल भेजी गई हैं।


सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों पर जवाब

एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर कुछ लोग इस घटना को नस्लीय भेदभाव से जोड़कर प्रचारित कर रहे हैं, जबकि अब तक की विवेचना में न तो ऐसी कोई बात सामने आई है और न ही पीड़ित पक्ष की ओर से दी गई तहरीर में इसका उल्लेख है।


क्या थी विवाद की असली वजह

जांच में सामने आया है कि घटना के दिन मणिपुर निवासी सूरज ख्वास अपने बेटे के जन्मदिन की पार्टी में दोस्तों के साथ मौजूद था। आपसी मजाक के दौरान एंजेल चकमा और उसके साथियों को लगा कि उनके ऊपर टिप्पणी की जा रही है। इसी गलतफहमी के चलते दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ और बात मारपीट तक पहुंच गई।


आरोपितों की पृष्ठभूमि

एसएसपी ने बताया कि अब तक की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपितों में

  • एक आरोपी नॉर्थ ईस्ट राज्य मणिपुर का निवासी है

  • एक आरोपी नेपाल का रहने वाला है

  • अन्य आरोपी पर्वतीय राज्यों से संबंधित हैं
    सभी आरोपित सामान्य शारीरिक बनावट के हैं और किसी भी प्रकार की नस्लीय टिप्पणी या हमले के प्रमाण नहीं मिले हैं।


आवेश में हुई घटना, नस्लीय एंगल नहीं

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से घटना वाले दिन की विस्तृत जानकारी जुटाई। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि यह घटना आवेश में हुई मारपीट का परिणाम थी, न कि नस्लीय हिंसा या भेदभाव का।


निष्कर्ष

देहरादून के एसएसपी के अनुसार, एंजेल चकमा की मौत एक दुखद घटना है, लेकिन अब तक की पुलिस जांच में इसे नस्लीय हिंसा से जोड़ने का कोई आधार नहीं मिला है। पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है और फरार आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

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