स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 28 मार्च 2026
देहरादून के राजकीय नारी निकेतन में संवासिनी की संदिग्ध आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने इस घटना का गंभीर संज्ञान लेते हुए तत्काल उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
घटना के बाद महिला आयोग की अध्यक्ष स्वयं नारी निकेतन पहुंचीं और मौके पर मौजूद अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिस संस्थान में महिलाओं की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होती है, वहां इस तरह की घटना होना बेहद चिंताजनक है और यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
चार घंटे के अंतराल पर उठे सवाल
जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट के अनुसार, मृतका ममता (35 वर्ष), निवासी हमीरपुर (उत्तर प्रदेश), पिछले छह महीनों से नारी निकेतन में रह रही थी और उसका मानसिक उपचार चल रहा था। उसकी हालत में सुधार भी देखा जा रहा था।
रिकॉर्ड के मुताबिक, घटना की रात करीब 11 बजे स्टाफ ने राउंड के दौरान उसे अपने बिस्तर पर सोते हुए देखा था, लेकिन रात 3 बजे के अगले निरीक्षण में वह सीढ़ियों की रेलिंग से फंदे पर लटकी मिली। इस चार घंटे के अंतराल ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
ड्यूटी स्टाफ की भूमिका की होगी जांच
महिला आयोग की अध्यक्ष ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद सभी कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच की जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाए कि मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला की निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आयोग ने कई अहम निर्देश जारी किए हैं। इनमें मानसिक रूप से अस्वस्थ संवासिनियों के लिए विशेष सुरक्षा योजना तैयार करना, संस्थान में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाना और नाइट शिफ्ट में स्टाफ की संख्या में वृद्धि करना शामिल है।
आयोग ने यह भी कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे सक्रिय निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
परिवार से जुड़े पहलुओं की भी होगी जांच
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यह जांच की जाए कि क्या मृतका अपने परिवार के पास जाने को लेकर किसी मानसिक दबाव, भय या असंतोष में थी। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की सूक्ष्म जांच की जाएगी।
प्रशासन ने दिए कार्रवाई के संकेत
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मृतका का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही नारी निकेतन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित किए जाएंगे।
निष्कर्ष:
नारी निकेतन जैसी संवेदनशील संस्था में हुई यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की चुनौतियों को भी सामने लाती है। महिला आयोग की सख्ती के बाद अब इस मामले में जिम्मेदारियों का तय होना और सुधारात्मक कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।



