देहरादून | बुधवार, 11 मार्च 2026
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ और केदारनाथ धाम को लेकर बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की बैठक में लिया गया एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है। समिति ने अपने अधीन आने वाले 47 मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया है। इस निर्णय के बाद अब प्रदेश की राजनीति और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
इस पूरे मामले पर अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव को गंभीरता से देख रही है और कानून, संबंधित एक्ट तथा पौराणिक परंपराओं का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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बीकेटीसी की बैठक में पारित हुआ प्रस्ताव
मंगलवार को आयोजित बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि बदरीनाथ, केदारनाथ धाम सहित समिति के अधीन आने वाले 47 मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए।
समिति के इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक स्तर पर इस पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि यह प्रस्ताव फिलहाल सरकार के विचाराधीन है।
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सीएम धामी बोले — सभी पहलुओं का होगा अध्ययन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड और समिति के प्रस्ताव का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
सीएम धामी के अनुसार, इस मामले में कानूनी प्रावधानों, संबंधित एक्ट और पौराणिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा, ताकि धार्मिक आस्था और संवैधानिक व्यवस्था दोनों का संतुलन बना रहे।
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केदारनाथ क्षेत्र में मांस और शराब पर प्रतिबंध की मांग
वहीं इस मुद्दे पर केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि उन्हें बीकेटीसी के इस प्रस्ताव की फिलहाल पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने केदारनाथ क्षेत्र में मांस और शराब के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई थी।
उन्होंने कहा कि केदारनाथ जैसे पवित्र धार्मिक स्थल की मर्यादा बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं और जो लोग इन नियमों का उल्लंघन करते हैं, उन पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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निष्कर्ष
बदरीनाथ और केदारनाथ धाम से जुड़ा यह प्रस्ताव धार्मिक आस्था और कानूनी व्यवस्था के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। बीकेटीसी द्वारा पारित प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय अब राज्य सरकार के अध्ययन और विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की धार्मिक और राजनीतिक चर्चाओं में प्रमुख रूप से बना रह सकता है।


