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बहादुरी की मिसाल बनी ‘देवभूमि की बिटिया’, स्कूल परिसर से भालू ने छात्र को घसीटा, आठवीं की दिव्या ने हिम्मत दिखाकर आरव को मौत के मुंह से छीना

तारीख: 23 दिसंबर 2025

स्थान: पोखरी, जनपद चमोली, उत्तराखंड

पोखरी (चमोली)। देवभूमि उत्तराखंड की बेटियां क्यों साहस की पहचान मानी जाती हैं, इसका जीवंत उदाहरण सोमवार को पोखरी ब्लॉक स्थित जूनियर हाईस्कूल हरिशंकर में देखने को मिला। स्कूल परिसर में घुसे दो भालुओं के हमले के बीच आठवीं कक्षा की छात्रा दिव्या ने अद्भुत हिम्मत दिखाते हुए न केवल अपने सहपाठियों की जान बचाई, बल्कि छठवीं के छात्र आरव को भी भालू के चंगुल से सुरक्षित निकाल लिया।


सुबह-सुबह स्कूल में मचा हड़कंप

सोमवार सुबह स्कूल खुलने से पहले छात्र-छात्राएं परिसर में टहल रहे थे। तभी अचानक जंगल की ओर से दो भालू विद्यालय परिसर में आ धमके। भालुओं को देखते ही बच्चों में अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार शुरू हो गई।


आरव पर हमला, झाड़ियों में घसीटा

इसी दौरान छोटे भालू ने छठवीं कक्षा के छात्र आरव पर हमला कर दिया और उसे घसीटते हुए झाड़ियों की ओर ले गया। यह दृश्य देखकर अन्य बच्चे डर के मारे सहम गए और कुछ पल के लिए कोई भी कुछ समझ नहीं पाया।


दिव्या का साहस: पहले बच्चों को सुरक्षित किया

ऐसे भयावह हालात में आठवीं की छात्रा दिव्या ने असाधारण सूझबूझ दिखाई। उसने तुरंत सभी बच्चों को एक कक्ष में भेजा और उन्हें अंदर बंद रहने को कहा, ताकि बड़े भालू से उनकी सुरक्षा हो सके


फिर खुद दौड़ी भालू के पीछे

इसके बाद दिव्या ने पल भर की भी देरी नहीं की। वह शोर मचाते हुए भालू के पीछे झाड़ियों की ओर दौड़ पड़ी, ताकि आरव को बचाया जा सके। उसकी आवाज सुनकर शिक्षक और स्कूल कर्मचारी भी मौके की ओर दौड़े।


दरवाजे को नोचता रहा बड़ा भालू

इसी बीच बड़ा भालू उस कक्ष के दरवाजे तक पहुंच गया, जहां बच्चे छिपे थे। उसने अपने नाखूनों से दरवाजे को नोचना शुरू कर दिया। दरवाजे में अंदर से कुंडी नहीं थी, लेकिन बच्चों ने पूरी ताकत लगाकर दरवाजा खुलने नहीं दिया।


शोर-शराबे से भागे भालू

दिव्या के साहस, बच्चों की चीख-पुकार और शिक्षकों के पहुंचने के बाद शोर-शराबा बढ़ गया, जिससे घबराकर दोनों भालू जंगल की ओर भाग गए। आरव को गंभीर अवस्था में सुरक्षित बाहर निकाला गया।


आरव की आपबीती: “आंखें बंद हो गई थीं”

घटना के बाद सहमा और जख्मी आरव बस इतना ही बता सका—
“भालू को अचानक सामने देखा तो मेरी आंखें बंद हो गईं। उसने मेरी पीठ पर पंजे मारे और मुझे घसीटकर ले गया।”


घटना के बाद फफक पड़ी बहादुर दिव्या

जिस दिव्या ने सभी की जान बचाई, वही घटना के बाद आपबीती सुनाते हुए फफक-फफक कर रो पड़ी। उसने बताया कि जब भालू आरव को घसीट रहा था, तब वह खुद को रोक नहीं सकी और बच्चों को सुरक्षित कर उसके पीछे दौड़ पड़ी।


शाम को फिर लौटे भालू, स्कूल में दहशत

प्रधानाचार्य उपेंद्र सती ने बताया कि विद्यालय बंद होने के बाद ग्रामीणों ने सूचना दी कि दोनों भालू फिर से स्कूल परिसर में देखे गए। आशंका है कि वे मध्याह्न भोजन सामग्री की गंध के कारण बार-बार स्कूल आ रहे हैं। अब भोजन सामग्री को अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।


पहले भी हो चुका है हमला

गौरतलब है कि बीते शनिवार को भी इसी विद्यालय के एक छात्र पर स्कूल जाते समय भालू के बच्चे ने हमला किया था। इसके बाद स्कूल खुलने का समय सुबह साढ़े आठ से बढ़ाकर दस बजे किया गया था और इस संबंध में एसडीएम व वन विभाग को भी अवगत कराया गया था।


निष्कर्ष

पोखरी के इस सरकारी स्कूल में घटी घटना ने जहां वन्यजीवों से बढ़ते खतरे की चिंता बढ़ा दी है, वहीं आठवीं की छात्रा दिव्या ने यह साबित कर दिया कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता। उसकी बहादुरी न केवल विद्यालय बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है।

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