ऋषिकेश (देहरादून) | 1 फरवरी 2026
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने केंद्रीय बजट 2026 को महिलाओं और बेटियों के सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं के लिए तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान “विकसित भारत” की मजबूत आधारशिला रखेगा और देश की मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाएगा।
ऋषिकेश स्थित व्यापार सभा भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कुसुम कंडवाल ने स्थानीय व्यापारियों और कार्यकर्ताओं के साथ केंद्रीय बजट सत्र का सीधा प्रसारण देखा। इसके बाद बजट पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह बजट महिलाओं के स्वाभिमान, आर्थिक मजबूती और सामाजिक नेतृत्व को समर्पित है।
अध्यक्ष कंडवाल ने इसे गर्व का विषय बताते हुए कहा कि लगातार नौ वर्षों से एक महिला के रूप में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट प्रस्तुत किया जाना, वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त होती नारी शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह देश की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस बार महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिए रिकॉर्ड राशि का आवंटन किया गया है। यह निवेश शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और स्वरोजगार के क्षेत्र में नए अवसर सृजित करेगा और देश की आधी आबादी को मुख्यधारा में लाने में अहम भूमिका निभाएगा।
कुसुम कंडवाल ने ‘लखपति दीदी’ योजना के विस्तार, कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास और क्रेच सुविधाओं में वृद्धि जैसे प्रावधानों को विशेष रूप से सराहा। उन्होंने कहा कि इन कदमों से महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें सुरक्षित एवं अनुकूल माहौल मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि आज देश की बेटियां केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं रहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनकर उभर रही हैं। मुद्रा लोन की सीमा में वृद्धि और प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं को मालिकाना हक मिलने से उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी बजट का स्वागत करते हुए इसे समावेशी और दूरदर्शी बताया। उन्होंने केंद्र सरकार के महिला सशक्तीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।
निष्कर्ष:
केंद्रीय बजट 2026 महिलाओं और बेटियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। शिक्षा से लेकर रोजगार और नेतृत्व तक, हर क्षेत्र में अवसरों का विस्तार “विकसित भारत” के संकल्प को मजबूत करेगा और देश की मातृशक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक बनेगा।



