देहरादून | 18 दिसंबर 2025
महिला सशक्तिकरण
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण तथा महिला आयोग के आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई। बैठक में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
आगामी कार्यक्रमों पर दिया गया प्रस्तुतीकरण
आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने मुख्यमंत्री धामी को उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा प्रस्तावित आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं को जागरूक करना, उन्हें सशक्त बनाना और उनके खिलाफ होने वाले अपराधों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए महिला हितों से जुड़े कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपयोगी मार्गदर्शन भी दिया।
महिला अधिकार और सुरक्षा पर सरकार की संवेदनशील भूमिका
कुसुम कण्डवाल ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग और प्रदेश सरकार महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार संवेदनशील और सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे पीड़ित महिलाओं को समय पर सहायता और न्याय मिल रहा है।
उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और साइबर अपराध पर त्वरित हस्तक्षेप
भेंट के दौरान अध्यक्ष कण्डवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार के सहयोग से महिला आयोग महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और साइबर अपराध जैसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी हस्तक्षेप कर रहा है। इससे पीड़ित महिलाओं को शीघ्र राहत और न्याय सुनिश्चित हो पा रहा है।
शहर के मध्य महिला आयोग कार्यालय का प्रस्ताव
बैठक के दौरान महिला आयोग अध्यक्ष ने राज्य महिला आयोग के कार्यालय को शहर के मध्य स्थापित किए जाने का प्रस्ताव भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए, ताकि महिलाओं को आयोग तक पहुंचने में आसानी हो सके।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री और महिला आयोग अध्यक्ष के बीच हुई यह भेंट राज्य में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आगामी कार्यक्रमों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से महिलाओं के अधिकारों की रक्षा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे उत्तराखंड में सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण का निर्माण होगा।


