राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने जनसुनवाई में 18 मामलों की सुनवाई की, अधिकारियों को योजनाओं की ग्राउंड लेवल मॉनिटरिंग के दिए निर्देश
पौड़ी गढ़वाल | 10 मार्च 2026
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के तहत मंगलवार को पौड़ी गढ़वाल के विकास भवन सभागार में उच्च स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई की अध्यक्षता राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने की। इस दौरान महिला उत्पीड़न और अन्य समस्याओं से जुड़े कुल 18 मामलों पर विस्तार से सुनवाई की गई, जिनमें 13 लिखित शिकायतें और 5 टेलीफोनिक शिकायतें शामिल थीं।
जनसुनवाई के दौरान कई संवेदनशील मामलों में मौके पर ही समाधान किया गया, जबकि कुछ मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए आयोग में समन जारी कर सूचीबद्ध किया गया। वहीं कुछ प्रकरणों को त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेजा गया।
महिला प्रधानाचार्य के उत्पीड़न मामले में कड़ा रुख
सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग की एक महिला प्रधानाचार्य ने खंड शिक्षा अधिकारी पर मानसिक उत्पीड़न और वेतन रोकने का आरोप लगाया। मामले को गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने जिलाधिकारी स्तर पर जांच समिति गठित करने और आरोपी खंड शिक्षा अधिकारी के तत्काल स्थानांतरण के निर्देश मुख्य शिक्षा अधिकारी को दिए।
वायरल फोटो मामले में पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश
यमकेश्वर क्षेत्र से आई एक शिकायत में सोशल मीडिया पर फोटो वायरल करने और पुलिस की कथित लापरवाही का मामला सामने आया। इस पर नाराजगी जताते हुए कुसुम कंडवाल ने मौके पर मौजूद पुलिस क्षेत्राधिकारी को दोषियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
नर्सिंग अधिकारी पर भी गिरी कार्रवाई की गाज
जनसुनवाई में सीएचसी पाबो में तैनात एक नर्सिंग अधिकारी के खिलाफ भी शिकायत सामने आई। आरोप था कि उसने शराब के नशे में सहकर्मी रोहित रावत के साथ अभद्र व्यवहार किया और सोशल मीडिया पर भी अपमानजनक टिप्पणी की। इस मामले में अध्यक्ष ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण लेने और उसका स्थानांतरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
ई-श्रम कार्ड की समस्या का मौके पर समाधान
जनसुनवाई के दौरान 53 वर्षीय पीड़िता मंजू देवी ने अपना ई-श्रम कार्ड न बनने की समस्या रखी। इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए और मौके पर ही ई-श्रम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर समस्या का समाधान कराया गया।
वन स्टॉप सेंटर की प्रगति की भी हुई समीक्षा
बैठक के दौरान वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल 2025 से अब तक 540 मामलों में से 460 मामलों का सफल निस्तारण किया जा चुका है, जिसे संतोषजनक प्रगति माना गया।
योजनाओं की ग्राउंड लेवल मॉनिटरिंग पर दिया जोर
अधिकारियों को संबोधित करते हुए कुसुम कंडवाल ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक समय पर पहुंचे, इसके लिए ग्राउंड लेवल पर नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी विभागों में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाएं घर और कार्यस्थल दोनों जगह दोहरी जिम्मेदारियां निभाती हैं, इसलिए उनके लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस जनसुनवाई में परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास विवेक उपाध्याय, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक रंजीत नेगी, पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर पौड़ी तुषार बोरा, विधि अधिकारी महिला आयोग दयाराम सिंह, कमल किशोर रावत, सुषमा रावत, जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल, प्रोबेशन अधिकारी अरविंद कुमार समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के तहत आयोजित यह जनसुनवाई महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। आयोग की सख्ती और प्रशासनिक निर्देशों से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में महिला उत्पीड़न के मामलों में तेजी से कार्रवाई होगी और पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय मिल सकेगा।




