चंपावत | 12 मार्च 2026
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के तहत गुरुवार को चंपावत जिले में महिला जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस दौरान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल और सदस्य किरण देवी की मौजूदगी में पीड़ित महिलाओं की समस्याएं सुनी गईं।
जनसुनवाई में कुल 18 फरियादियों ने अपनी शिकायतें आयोग के सामने रखीं, जिनमें से 14 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि 4 जटिल पारिवारिक मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए आयोग के देहरादून मुख्यालय भेजा गया।
“जो महिलाएं आयोग तक नहीं पहुंच सकतीं, आयोग खुद पहुंचेगा उनके द्वार”
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग के आह्वान पर 9 से 13 मार्च तक पूरे उत्तराखंड में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत आयोग की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य विभिन्न जिलों में जाकर जनसुनवाई कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पीड़ित महिला न्याय से वंचित न रहे। जो महिलाएं भौगोलिक दूरी या आर्थिक कारणों से देहरादून स्थित आयोग मुख्यालय तक नहीं पहुंच पातीं, उनके लिए आयोग स्वयं उनके द्वार तक पहुंच रहा है।
कार्यस्थलों पर ICC कमेटी अनिवार्य बनाने के निर्देश
जनसुनवाई के दौरान अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी और निजी संस्थानों में अनिवार्य रूप से इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (ICC) का गठन किया जाए, ताकि कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न के मामलों में तत्काल कार्रवाई हो सके।
उन्होंने अधिकारियों को विभागीय स्तर पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए।
पुलिस प्रशासन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि थानों में महिलाओं के साथ व्यवहार संवेदनशील और सम्मानजनक होना चाहिए। पुलिस को पीड़ित महिलाओं की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुनकर त्वरित जांच करनी चाहिए और उसकी रिपोर्ट आयोग को भेजनी चाहिए।
हत्या और छेड़छाड़ के मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश
जनसुनवाई के दौरान एक महिला ने शिकायत की कि होली के दौरान उसके भाई की हत्या कर दी गई थी, लेकिन वह पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं है।
इस पर अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक चंपावत को तत्काल जांच अधिकारी बदलने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वहीं एक अन्य युवती ने अपने सगे भाइयों पर मारपीट और नशे की हालत में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। इस मामले में अध्यक्ष ने पुलिस अधिकारियों को आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पारिवारिक विवादों में समझौते पर दिया जोर
पारिवारिक विवादों की सुनवाई करते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि तलाक किसी भी पारिवारिक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता।
उन्होंने कहा कि पति-पत्नी को आपसी मतभेदों को दूर कर बच्चों के बेहतर भविष्य और अच्छे संस्कारों के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए।
जनसुनवाई के दौरान सामने आए कुछ प्रमुख मामलों में—
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एक महिला ने पति द्वारा मारपीट की शिकायत की, जिस पर सीओ टनकपुर को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
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एक महिला ने बताया कि उसका पति चार साल पहले पंजाब काम करने गया था और अब संपर्क नहीं कर रहा, जिस पर पुलिस को पति को तलब करने के निर्देश दिए गए।
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एक पति ने शिकायत की कि उसकी पत्नी मायके चली गई है और ढाई साल की बेटी से मिलने नहीं दे रही, इस पर बाल कल्याण समिति (CWC) को पिता-पुत्री की मुलाकात सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए।
पानी की समस्या पर जिलाधिकारी को निर्देश
जनसुनवाई के दौरान अमोली ग्राम की प्रधान ने क्षेत्र में पेयजल संकट की समस्या उठाई। इस पर अध्यक्ष ने जिलाधिकारी चंपावत को पेयजल योजना को तत्काल सुचारू करने और महिलाओं की समस्या दूर करने के निर्देश दिए।
हेल्पलाइन और सरकारी योजनाओं के प्रचार पर जोर
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिलाओं को 181 महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर (OSC) और जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मिल रही हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि जो महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाते हैं।
कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
जनसुनवाई के दौरान मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जीएस खाती, अपर जिलाधिकारी के.एन. गोस्वामी, एडिशनल सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, क्षेत्र पंचायत सदस्य रजनी नरियाल, ग्राम प्रधान गीता देउपा, हेमा जोशी, प्रेमा पांडे, आनंद अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी और वन स्टॉप सेंटर के कर्मचारी सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के माध्यम से राज्य महिला आयोग ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों की महिलाओं तक न्याय पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। चंपावत में आयोजित जनसुनवाई ने यह साबित किया कि यदि प्रशासन संवेदनशीलता और तत्परता से काम करे तो कई समस्याओं का समाधान मौके पर ही संभव है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना शासन और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है।






