देहरादून | 31 जनवरी 2026
महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन को अब राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) में शामिल किया जा रहा है। इस फैसले से देशभर में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने में मदद मिलेगी। उत्तराखंड में भी इस निर्णय के क्रियान्वयन की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
राज्य में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल से स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण का रोस्टर जारी कर दिया गया है। इससे संकेत मिलते हैं कि जल्द ही टीकाकरण अभियान को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज होगी।
स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की प्राचार्या एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता जैन ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन को राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल किया जाना महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग इस निर्णय को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है।
विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी एक सामान्य वायरस है, जो आगे चलकर महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है। यह कैंसर देश में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। एचपीवी वैक्सीन बीमारी होने से पहले सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
9 से 14 वर्ष की किशोरियां होंगी लक्ष्य समूह
सरकारी योजना के तहत एचपीवी टीकाकरण का मुख्य लक्ष्य 9 से 14 वर्ष की किशोरियां होंगी। चिकित्सकों का कहना है कि इस आयु वर्ग में वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी होती है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत शामिल होने से यह वैक्सीन अब दूर-दराज के इलाकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक भी आसानी से पहुंच सकेगी।
यूआईपी में शामिल होने से बढ़ेगी पहुंच
फिलहाल एचपीवी वैक्सीन निजी क्षेत्र में उपलब्ध है, जबकि कुछ राज्यों और चिकित्सा संस्थानों में इसे निशुल्क या रियायती दरों पर दिया जा रहा है। लेकिन यूआईपी में शामिल होने के बाद इसकी उपलब्धता व्यापक स्तर पर सुनिश्चित हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी देखी जा सकेगी।
जागरूकता भी उतनी ही जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण के साथ-साथ समाज में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। भ्रांतियों, झिझक और गलत धारणाओं को दूर किए बिना इस अभियान की सफलता संभव नहीं है।
निष्कर्ष
एचपीवी वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करना महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह पहल न केवल सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में सहायक होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य भी देगी।


