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मानसून बना मुसीबत, इधर प्रोटोकॉल विवाद ने पकड़ा तूल – देहरादून डीएम से मांगा गया स्पष्टीकरण

Uttarakhand News | प्रशासन और मौसम दोनों चर्चा में
स्थान: देहरादून | 1 जुलाई 2025


उत्तराखंड में बारिश ने तोड़े रिकॉर्ड, लोकसभा अध्यक्ष को सम्मान न देने पर शासन सख्त

उत्तराखंड में जहां एक ओर मानसून ने इस बार जून महीने में ही रौद्र रूप दिखा दिया, वहीं दूसरी ओर लोकसभा अध्यक्ष के दौरे में प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला शासन के लिए नई चुनौती बनकर सामने आया है।

एक ओर आपदा का खतरा, दूसरी ओर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप – दोनों ही विषयों ने राजधानी देहरादून में हलचल मचा दी है।


36% ज्यादा बारिश, मानसून बना आफत

उत्तराखंड में इस बार मानसून ने समय से पहले दस्तक दी।

  • 1 से 30 जून के बीच राज्य में औसतन 240.7 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई
  • यह आंकड़ा सामान्य औसत 176.8 मिमी से 36% अधिक है
  • अधिक बारिश से कई जिलों में भूस्खलन, सड़क अवरोध और जलभराव की स्थिति बन रही है

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यही रफ्तार जारी रही तो जुलाई-अगस्त में हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं। प्रशासन ने हाई अलर्ट पर रहने की हिदायत दी है।


प्रोटोकॉल विवाद: डीएम देहरादून से मांगा गया जवाब

इस बीच एक और गंभीर मामला सामने आया है।
12 जून को देहरादून दौरे पर आए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेकर यह आरोप है कि प्रशासन ने निर्धारित प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का पालन नहीं किया।

  • लोकसभा सचिवालय की ओर से इस पर औपचारिक शिकायत की गई है
  • भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ने भी 19 जून को इस पर गंभीर चिंता जताई
  • उत्तराखंड शासन के प्रोटोकॉल विभाग ने जिलाधिकारी देहरादून से लिखित स्पष्टीकरण तलब किया है

क्या है मामला?

लोकसभा सचिवालय ने बताया कि:

  • दौरे के दौरान लोकसभा अध्यक्ष को अपेक्षित स्वागत और सम्मान नहीं मिला
  • डीएम से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला
  • राज्य शासन ने इसे प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है

शासन का कड़ा रुख: “उल्लंघन नहीं होगा बर्दाश्त”

प्रोटोकॉल विभाग द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है:

“प्रोटोकॉल मानकों का उल्लंघन शासन की गरिमा से जुड़ा विषय है, इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारी से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।”


अब आगे क्या?

  • डीएम देहरादून को जल्द जवाब देना होगा
  • रिपोर्ट के आधार पर शासन अगली कार्रवाई करेगा
  • यह मामला अब प्रशासनिक स्तर पर अनुशासन और जवाबदेही का प्रतीक बन गया है

निष्कर्ष: जहां एक ओर मौसम कहर बनकर टूट रहा है, वहीं प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि शासन इन दोनों मोर्चों पर कैसे प्रतिक्रिया देता है।

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