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“मैं हूं” का संदेश: टाइगर अभी जिंदा है, पूर्व सीएम हरीश रावत का भाजपा पर तीखा हमला

देहरादून | 20 दिसंबर 2025

बयानों से फिर सियासी हलचल

प्रदेश कांग्रेस में भले ही पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय राजनीति में कम दिखाई दे रहे हों, लेकिन उनके बयान अक्सर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर देते हैं। एक बार फिर उन्होंने अपने तीखे और बेबाक अंदाज में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि “मैं हूं” का अर्थ है कि टाइगर अभी जिंदा है।


“भाजपा को पराजित करने की क्षमता अभी भी है”

शुक्रवार को देहरादून स्थित अपने निजी आवास पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि उनके भीतर आज भी इतनी राजनीतिक शक्ति और ऊर्जा है कि वे भाजपा को कड़ी चुनौती दे सकते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर जरा सा भी हवा का रुख बदला तो देखिएगा, उत्तराखंड में भाजपा को बुरी तरह पराजित किया जाएगा।”


मनरेगा को लेकर भाजपा पर प्रहार

पूर्व मुख्यमंत्री ने मनरेगा के मुद्दे को लेकर भी भाजपा को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महात्मा गांधी के नाम को योजनाओं से हटाकर उनके विचारों और योगदान को खत्म करने का प्रयास कर रही है।
रावत ने कहा कि महात्मा गांधी दुनिया में भगवान राम के सबसे बड़े भक्त थे और उन्होंने देश को “रघुपति राघव राजा राम” जैसा अमूल्य भजन दिया।


“राम भक्तों को आगे रखते थे, भाजपा गांधी का नाम मिटा रही”

हरीश रावत ने कहा कि भगवान राम हमेशा अपने भक्तों को आगे रखते थे, लेकिन भाजपा उनके सबसे बड़े भक्त महात्मा गांधी के नाम को योजनाओं से हटाने का काम कर रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज़ाद भारत में किसी ने कभी कल्पना की थी कि महात्मा गांधी के नाम पर चल रही किसी योजना को समाप्त किया जाएगा।


ग्राम सरकार की अवधारणा पर भी खतरे का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलकर भाजपा केवल महात्मा गांधी का नाम ही नहीं हटा रही, बल्कि ग्राम सरकार की उस अवधारणा को भी कमजोर कर रही है, जिसकी नींव गांधी जी ने रखी थी। उनके अनुसार यह कदम ग्रामीण भारत की आत्मा पर प्रहार के समान है।


निष्कर्ष

हरीश रावत के बयान से साफ है कि वे भले ही चुनावी मैदान में फिलहाल सक्रिय न दिखें, लेकिन सियासी मोर्चे पर उनकी मौजूदगी और तेवर बरकरार हैं। भाजपा पर सीधा हमला करते हुए उन्होंने यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस की राजनीति में उनकी भूमिका अभी समाप्त नहीं हुई है और आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति में टाइगर की दहाड़ फिर सुनाई दे सकती है।

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