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रजत जयंती उत्सव विशेष उत्तराखंड का खेल सफर: शून्य से शिखर तक, 25 से 7वें पायदान तक की ऐतिहासिक छलांग

देहरादून | 7 नवंबर 2025


25 वर्ष, एक बदलता हुआ खेल नक्शा

रजत जयंती उत्सव के अवसर पर उत्तराखंड का खेल विभाग अपनी अब तक की उपलब्धियों को नये अंदाज में प्रस्तुत कर रहा है। राज्य बनने के बाद जहां खेलों का ढांचा बेहद सीमित था, वहीं आज उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में है जिन्होंने खेलों में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है।
साल 2000 में सिर्फ एक करोड़ रुपये के वार्षिक बजट से शुरू हुई यह यात्रा आज 275 करोड़ रुपये के खेल बजट तक जा पहुंची है।


अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं का विस्तार: खेल ढांचे को मिला नया आयाम

उत्तराखंड अब उन राज्यों में शामिल है जिनकी खेल सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती हैं।
राज्य में अब:

  • आइस स्केटिंग
  • स्वीमिंग
  • शूटिंग
  • इंडोर व आउटडोर गेम्स
  • दो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम (देहरादून व हल्द्वानी)

जैसी संसाधनयुक्त सुविधाएं मौजूद हैं।
इसके अतिरिक्त हल्द्वानी के गौलापार में राज्य का पहला स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी भी आकार ले रही है, जबकि चंपावत के लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज लगभग तैयार है।


राज्य गठन के समय की सीमित स्थिति

2000 में खेल विभाग के पास था:

  • 9 आउटडोर स्टेडियम
  • 1 बहुद्देशीय हॉल
  • 2 तरणताल
  • 1 इंडोर हॉल
  • 1 स्पोर्ट्स कॉलेज

उपलब्धियां सीमित थीं, पर युवा क्षमता असीमित। यही क्षमता अगले ढाई दशक में राज्य को देश के प्रमुख खेल केंद्रों में लाकर खड़ा कर गई।


38वें राष्ट्रीय खेल: जिसने बदल दिया खेलों का भविष्य

उत्तराखंड ने 38वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के दौरान वह प्रदर्शन किया जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा।
इस आयोजन ने न सिर्फ खेल अवसंरचना को आधुनिक बनाया बल्कि खिलाड़ियों का मनोबल भी दोगुना कर दिया।

प्रमुख उपलब्धियां:

  • 100 से अधिक पदक, जिनमें 24 स्वर्ण पदक
  • रैंकिंग में 25वें से सीधा 7वें पायदान तक की ऐतिहासिक छलांग
  • युवा खिलाड़ियों के लिए योजनाओं की शुरुआत
  • इनाम राशि में दोगुना इजाफा
  • खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सेवायोजन
  • सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत आरक्षण

राज्य के खिलाड़ियों ने इन खेलों को उत्तराखंड के स्वर्णिम अध्याय में बदल दिया।


23 खेल अकादमियों की ओर कदम: भविष्य की नींव तैयार

उत्तराखंड देश का वह पहला राज्य बनने जा रहा है जहां 23 खेल अकादमियों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है।
इन अकादमियों का उद्देश्य है:

  • प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को विशेषज्ञ प्रशिक्षण
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं
  • खेल विज्ञान आधारित कोचिंग
  • भविष्य के ओलंपिक खिलाड़ियों का विकास

राज्य का लक्ष्य स्पष्ट है—ओलंपिक में भारत को शीर्ष पर पहुंचाने के लिए विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार करना।


खिलाड़ियों के लिए विशेष योजनाएं

युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय/राष्ट्रीय पदक विजेताओं को आउट ऑफ टर्न नौकरी
  • मुख्यमंत्री उदयीमान खिलाड़ी उन्नयन योजना (8 से 14 वर्ष):
    प्रत्येक जिले से 150 बालक व 150 बालिकाओं को प्रति माह 1500 रुपये की छात्रवृत्ति
  • मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना (14 से 23 वर्ष):
    प्रत्येक जिले से 100 बालक व 100 बालिकाओं को प्रति माह 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि
    साथ ही 10,000 रुपये का खेल सामग्री अनुदान

खेल मंत्री रेखा आर्या का संदेश

खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा:
“हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड को केवल देवभूमि नहीं, बल्कि खेल भूमि के रूप में भी वैश्विक पहचान मिले। 38वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान बनाई गई खेल अवसंरचना और योजनाओं का परिणाम है कि राज्य ने 24 स्वर्ण समेत 100 से अधिक पदक जीते। अब हमारा लक्ष्य ओलंपिक के लिए देश को शीर्ष खिलाड़ी देना है।”


निष्कर्ष

उत्तराखंड का 25 वर्ष का यह खेल सफर सिर्फ विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है जिसने सीमित संसाधनों से शुरू होकर राष्ट्रीय खेल मंच पर नई पहचान गढ़ी।
अब राज्य न सिर्फ खेलों में आत्मनिर्भर होता दिख रहा है, बल्कि भविष्य में ओलंपिक चैंपियनों की जननी बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
रजत जयंती उत्सव ने यह साबित कर दिया है कि उत्तराखंड के खेलों का भविष्य पहले से कहीं अधिक उज्ज्वल है।

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