स्थान : देहरादून, उत्तराखंड
तारीख : 22 दिसंबर 2025
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने स्पष्ट किया है कि पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की समस्याओं के समाधान में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि सैनिकों और उनके परिवारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
जन मिलन कार्यक्रम का उद्देश्य
राज्यपाल ने कहा कि जन मिलन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों, विशेष रूप से पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की समस्याओं को सीधे सुनना और उनका त्वरित व प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि संवाद से ही प्रशासन और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है।
लोक भवन में हुई सीधी सुनवाई
रविवार को देहरादून स्थित लोक भवन में आयोजित जन मिलन कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने पूर्व सैनिकों सहित आम नागरिकों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने सभी मामलों पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
चार जिलों से पहुंचे शिकायतकर्ता
कार्यक्रम में पौड़ी, अल्मोड़ा, ऊधमसिंह नगर और देहरादून जिलों से आए कुल 12 लोगों ने अपनी समस्याएं राज्यपाल के समक्ष रखीं। इनमें भूमि विवाद, मुआवजा, रोजगार, विकास कार्यों में देरी और आर्थिक सहायता से जुड़े मामले प्रमुख रहे।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
राज्यपाल ने शिकायत निवारण अधिकारी को निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों को तत्काल संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले का समाधान निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
छोटी समस्याएं समय पर सुलझें
राज्यपाल ने कहा कि कई बार समस्याएं छोटी होती हैं, लेकिन समय पर समाधान न होने के कारण वे जटिल रूप ले लेती हैं। इससे आमजन को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है।
संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की अपेक्षा
उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि समस्याओं का निस्तारण नियमानुसार, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ किया जाए। राज्यपाल के निर्देशों के बाद त्वरित कार्रवाई होने पर शिकायतकर्ताओं और उनके परिजनों ने राज्यपाल के प्रति आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष
राज्यपाल का यह रुख दर्शाता है कि पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर प्रशासन गंभीर है। जन मिलन जैसे कार्यक्रम न केवल समस्याओं के समाधान का माध्यम बन रहे हैं, बल्कि शासन और जनता के बीच भरोसे को भी मजबूत कर रहे हैं। अब उम्मीद है कि दिए गए निर्देशों के अनुसार मामलों का समयबद्ध समाधान होगा।


