तारीख: 23 दिसंबर 2025
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान उस समय बढ़ गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत को लेकर बनाई गई एक कथित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जनित रील सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस रील को लेकर हरीश रावत ने भाजपा पर सुनियोजित साजिश रचने का आरोप लगाया और शुक्रवार को समर्थकों के साथ नेहरू कॉलोनी थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।
“एआई के जरिए झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा”
थाने पहुंचने से पहले हरीश रावत ने कहा कि यह रील पूरी तरह से एआई तकनीक के जरिए बनाई गई है, जिसका उद्देश्य उनकी छवि खराब करना और उन्हें देशविरोधी साबित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बार-बार झूठ का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
2017 और 2022 के आरोपों को दोहराया
हरीश रावत ने कहा कि 2017 में भी भाजपा ने झूठ फैलाया, तब कहा गया कि कांग्रेस सरकार जुमे की नमाज के लिए छुट्टी करवाएगी। 2022 में भी मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने जैसे झूठे दावे फैलाए गए। अब एक बार फिर एआई तकनीक का इस्तेमाल कर वही राजनीति दोहराई जा रही है।
“मुझे देशद्रोही तक बताया जा रहा”
पूर्व मुख्यमंत्री ने भावुक लहजे में कहा कि उन्हें देशद्रोही, पाकिस्तान को सूचनाएं देने वाला व्यक्ति तक बताया जा रहा है। उन्होंने कहा,
“मेरे खिलाफ एआई से प्रपंच रचकर भाजपा फिर से झूठ का सहारा ले रही है। इस बार मैंने तय कर लिया है कि प्राण भले ही चले जाएं, लेकिन भाजपा के झूठ का पर्दाफाश जरूर करूंगा।”
क्या है वायरल रील का कंटेंट
करीब 29 सेकंड की इस वायरल रील की शुरुआत में हरीश रावत की एआई से बनाई गई आवाज में यह कहते हुए दिखाया गया है—
“मुस्लिम शरणं गच्छामि, मजार शरणं गच्छामि, लव जिहाद शरणं गच्छामि।”
इसके बाद रील में मजार निर्माण, मुस्कुराते लोगों के दृश्य और उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ से ‘मजारों की भूमि’ में बदलने जैसे कथित संदेश दिखाए गए हैं।
रील के अंत में भाजपा का संदेश
रील के अंत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पुलिस बल और बुलडोजर के साथ चलते हुए दिखाया गया है। साथ ही संदेश दिया गया है कि—
“सत्ता की लालच में अंधी कांग्रेस ने हमेशा कुर्सी की परवाह की, भले ही देवभूमि की पवित्रता से समझौता करना पड़े। लेकिन अब और नहीं।”
कानूनी कार्रवाई की मांग
हरीश रावत ने पुलिस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और एआई से बनी फर्जी सामग्री फैलाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में झूठ और तकनीक के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में वायरल एआई रील का मामला अब केवल सोशल मीडिया विवाद नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पुलिस जांच किस दिशा में जाती है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।


