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विकासनगर में साइबर ठगी का बड़ा मामला: बैंक बनकर कॉल, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य के खाते से 5.82 लाख रुपये पार

देहरादून (विकासनगर) | दिनांक: 22 मार्च 2026

उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक बार फिर अपनी चालाकी से बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। बैंक अधिकारी बनकर की गई एक कॉल के झांसे में आकर पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। ठगों ने खाते से कुल 5.82 लाख रुपये उड़ा लिए।


बैंक के नाम पर आया फोन, यहीं से शुरू हुआ खेल

कोतवाली क्षेत्र के दिनकर विहार निवासी शमशेर सिंह, जो पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रह चुके हैं, ने इस संबंध में ई-एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि 2 फरवरी को उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आई।

कॉलर ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका YONO ऐप बंद हो गया है और उसे दोबारा चालू करना होगा। इसी बहाने उसने उनसे बैंक खाते से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर ली।


खाता होल्ड कराने के बाद भी नहीं रुकी ठगी

शमशेर सिंह को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह तुरंत बैंक पहुंचे और अपने खाते को होल्ड करवा दिया। इसके बाद 17 मार्च को दोबारा बैंक जाकर कर्मचारियों से बातचीत कर उन्होंने खाता चालू कराया।

बैंककर्मियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि अब कोई खतरा नहीं है, लेकिन अगले ही दिन 18 मार्च को ठगों ने उनके खाते से दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 5.82 लाख रुपये निकाल लिए।


पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली विकासनगर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि साइबर सेल की मदद से पूरे मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।


पुलिस की अपील: सतर्क रहें, जानकारी साझा न करें

कोतवाली प्रभारी विनोद सिंह गुसाईं ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी बैंक अपने ग्राहकों से फोन पर खाता नंबर, एटीएम डिटेल, ओटीपी या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगता है।

उन्होंने सलाह दी कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या व्हाट्सएप लिंक पर भरोसा न करें और न ही उस पर क्लिक करें। यदि किसी के साथ ऑनलाइन ठगी होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।


निष्कर्ष

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है। इसलिए डिजिटल लेन-देन के दौरान सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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