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खाड़ी देशों में युद्ध का असर उत्तराखंड के बाजारों तक, देहरादून में रिफाइंड तेल के दाम बढ़कर 2300 रुपये प्रति टिन

देहरादून, 7 मार्च। खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब उत्तराखंड के स्थानीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव के कारण देहरादून में रिफाइंड तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। बीते कुछ दिनों में तेल के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है।


कुछ ही दिनों में बढ़े तेल के दाम

व्यापारियों के अनुसार हाल तक 15 किलो का रिफाइंड तेल का टिन करीब 2200 रुपये में बिक रहा था, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर लगभग 2300 रुपये प्रति टिन तक पहुंच गई है। इस अचानक हुई बढ़ोतरी का सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय हालात और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे प्रभाव से जोड़ा जा रहा है।

स्थानीय आढ़ती मनोज गोयल ने बताया कि खाड़ी देशों में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में अस्थिरता देखने को मिल रही है, जिसका असर सीधे तौर पर स्थानीय बाजारों में दिखाई दे रहा है।


छोटे पैकेटों की कीमतों में भी बढ़ोतरी

केवल बड़े टिन ही नहीं बल्कि छोटे पैकेटों के दाम भी बढ़े हैं। बाजार में मिलने वाला 900 एमएल का रिफाइंड तेल पैकेट, जो पहले करीब 105 रुपये में उपलब्ध था, अब बढ़कर 110 रुपये तक पहुंच गया है।

व्यापारी विक्की गोयल के मुताबिक देहरादून में रिफाइंड तेल की आपूर्ति मुख्य रूप से गुजरात से होती है, जबकि सोयाबीन तेल अमेरिका सहित अन्य देशों से आयात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और खाद्य तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव होने से इसका असर देश के विभिन्न शहरों के बाजारों पर पड़ रहा है।


सूखे मेवों पर भी पड़ सकता है असर

व्यापारियों का कहना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर अन्य आयातित खाद्य उत्पादों पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर सूखे मेवों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

व्यापारी देवेंद्र साहनी ने बताया कि देहरादून के बाजार में मिलने वाला पिस्ता मुख्य रूप से ईरान से आयात होता है। फिलहाल इसके दाम स्थिर हैं, लेकिन अगर आपूर्ति में बाधा आती है तो आने वाले दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।


निष्कर्ष

खाड़ी देशों में जारी युद्ध और वैश्विक बाजार की अस्थिरता का असर अब स्थानीय बाजारों में भी साफ नजर आने लगा है। रिफाइंड तेल की बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन रही हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में खाद्य तेल के साथ-साथ अन्य आयातित वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ने की संभावना है।

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