देहरादून, 7 मार्च
नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तराखंड ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 के राष्ट्रीय स्तर पर किए गए मूल्यांकन में राज्य ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के सीसीटीएनएस/आईसीजेएस प्रोग्रेस डैशबोर्ड पर जनवरी 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड को 93.46 अंक मिले हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं।
रैंकिंग में हरियाणा दूसरे, असम तीसरे स्थान पर
राष्ट्रीय स्तर पर जारी इस रैंकिंग में हरियाणा 93.41 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि असम 93.16 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा सिक्किम 91.82 अंकों के साथ चौथे और मध्य प्रदेश 90.55 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड ने तकनीकी प्रणाली को तेजी से लागू करने और डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने के कारण यह उपलब्धि हासिल की है।
नए आपराधिक कानूनों को लागू करने पर विशेष जोर
देश में हाल ही में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों — भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) — के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तराखंड सरकार ने लगातार निगरानी और समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने समय-समय पर अधिकारियों के साथ बैठकें कर इन कानूनों के कार्यान्वयन की प्रगति का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
‘वन डेटा, वन एंट्री’ व्यवस्था से कम हुआ कागजी काम
आईसीजेएस 2.0 के तहत राज्य में ‘वन डेटा, वन एंट्री’ व्यवस्था लागू की गई है। इस प्रणाली के माध्यम से पुलिस, न्यायालय, जेल, अभियोजन और फॉरेंसिक विभाग के बीच डेटा सीधे साझा किया जा रहा है।
इसके तहत CCTNS, ई-कोर्ट, ई-जेल, ई-अभियोजन और ई-फॉरेंसिक सिस्टम को एकीकृत किया गया है। इससे न केवल कागजी प्रक्रिया कम हुई है, बल्कि मामलों के निस्तारण की गति भी तेज हुई है।
साथ ही ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के माध्यम से अपराध स्थल की वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था भी लागू की गई है।
23 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण
नए कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य में 23 हजार से अधिक पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा न्याय श्रुति प्रणाली के माध्यम से वर्चुअल सुनवाई और फॉरेंसिक मोबाइल वैन जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया गया है।
पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुनील कुमार मीणा ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ रीयल-टाइम डेटा एंट्री और डिजिटल प्रक्रियाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
निष्कर्ष
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में देशभर में पहला स्थान हासिल करना उत्तराखंड के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। तकनीक आधारित न्याय प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों के कारण राज्य में अपराध जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। आने वाले समय में यह व्यवस्था कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।


