दुर्घटना, बीमारी और गरीबी से जूझते 158 फरियादी पहुंचे जनसुनवाई में
देहरादून | उत्तराखंड
दिनांक: 27 जनवरी 2026
सोमवार को आयोजित जनता दरबार में प्रशासन के सामने मानवीय पीड़ा की कई तस्वीरें सामने आईं। एक महिला की आंखों में आंसू और आवाज में बेबसी थी—“साहब, मेरे पति दुर्घटना में अपने पैर गंवा चुके हैं। हाथों में भी गंभीर चोटें हैं। बैंक से लिया गया पांच लाख रुपये का कर्ज अब चुकाना हमारे लिए असंभव हो गया है।” महिला की इस व्यथा को सुनते ही जिलाधिकारी सविन बंसल ने संबंधित अधिकारियों को बैंक से समन्वय स्थापित कर समस्या का समाधान निकालने के निर्देश दिए।
जनसुनवाई में कुल 158 फरियादी अपनी-अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। किसी को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत दाखिला नहीं मिला था, तो कोई गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक मदद मांग रहा था। कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि शेष शिकायतों पर जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
खेरी रोड, छदमीवाला निवासी कैंसर पीड़ित विधवा महिला ने अपनी छोटी बेटी कनिका की स्कूल फीस माफ कराने की गुहार लगाई। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नंदा-सुनंदा योजना के अंतर्गत फीस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
चकतुनवाला क्षेत्र के किसानों ने शिकायत दर्ज कराई कि एक प्रॉपर्टी डीलर ने सरकारी रास्ता बंद कर दिया है, जिससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही है। इस पर जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए।
डालनवाला निवासी सीमा गुप्ता ने फरवरी 2024 में सड़क दुर्घटना के बाद हुए गंभीर फ्रैक्चर का हवाला देते हुए आर्थिक सहायता की मांग की। इस पर उन्हें हिट एंड रन योजना के तहत पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
मन्नूगंज निवासी विधवा बुजुर्ग मीना आनंद ने आर्थिक तंगी की जानकारी दी, जबकि चंद्रशेखर आजाद कॉलोनी निवासी वीरेंद्र धीमान ने पैरालिसिस अटैक के बाद आजीविका चलाने में असमर्थता जताई। दोनों मामलों में जिलाधिकारी ने राइफल फंड से सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
ओगल भट्टा निवासी मोनिका ने अपनी बेटियों नंदिता और नंदिनी की शिक्षा प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के तहत कराने का अनुरोध किया। वहीं सहस्रधारा निवासी विधवा भारती बडोला ने शिकायत की कि उनकी दिव्यांग पुत्री को मान्यता प्राप्त शालिनी पब्लिक स्कूल ने आरटीई अधिनियम के अंतर्गत प्रवेश नहीं दिया। इस पर शिक्षा अधिकारी को तत्काल प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए।
निष्कर्ष:
जनता दरबार में सामने आईं समस्याओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि आमजन आज भी प्रशासन से संवेदनशील और त्वरित सहयोग की उम्मीद रखता है। जिलाधिकारी द्वारा मौके पर दिए गए निर्देशों से पीड़ितों को राहत की उम्मीद जगी है। अब चुनौती इन निर्देशों के समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन की है, ताकि पीड़ितों की पीड़ा केवल कागजों तक सीमित न रह जाए, बल्कि उन्हें वास्तविक राहत मिल सके।


