चकराता (देहरादून) | 17 दिसंबर 2025
उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र में स्थित सिलगुर देवता मंदिर प्रवेश हिंसा कांड में नौ वर्षों बाद एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। वर्ष 2016 में हुई इस चर्चित घटना के संबंध में अदालत ने पूर्व सांसद तरुण विजय को आगामी 19 दिसंबर को जिला अदालत में उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
20 मई 2016 की वह घटना, जिसने देश को झकझोर दिया
यह घटना 20 मई 2016 को उस समय घटी थी, जब तत्कालीन सांसद तरुण विजय पुजारियों की ओर से प्रतिबंधित सिलगुर देवता मंदिर में दलित समुदाय के सदस्यों के साथ प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान मंदिर क्षेत्र में मौजूद लोगों ने उन पर पथराव कर दिया। हमले में तरुण विजय घायल हो गए थे और मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी।
एंबुलेंस लौटाई गई, हालात बने और गंभीर
प्रत्यक्षदर्शियों और अभिलेखों के अनुसार, घायल तरुण विजय के लिए मौके पर पहुंची एंबुलेंस को भी वापस लौटा दिया गया था। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। बाद में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।
देश-विदेश तक गूंजी घटना की गूंज
सिलगुर देवता मंदिर कांड की गूंज केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश और विदेशों में भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ अधिकारी भैया जी जोशी, कांग्रेस नेता सचिन पायलट, बसपा सुप्रीमो मायावती, दलित नेता रामविलास पासवान सहित विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने तरुण विजय के समर्थन में बयान दिए थे।
राज्यपाल ने भेजा था विशेष हेलीकॉप्टर, सीएम पहुंचे अस्पताल
घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन राज्यपाल के.के. पॉल ने घायल तरुण विजय को उपचार के लिए लाने हेतु विशेष हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कराई थी। उस समय के मुख्यमंत्री हरीश रावत स्वयं अस्पताल पहुंचे थे और उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए थे।
19 दिसंबर को अदालत में दर्ज होंगे बयान
करीब नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अब यह मामला एक बार फिर न्यायिक मंच पर चर्चा में है। अदालत ने पूर्व सांसद तरुण विजय को 19 दिसंबर को जिला अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने और बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया है। इस सुनवाई को मामले की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।
तरुण विजय का पक्ष: जातिवाद को बताया सबसे बड़ा शत्रु
बयान दर्ज कराने से पूर्व तरुण विजय ने इस पूरे प्रकरण पर अपना दृष्टिकोण सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि हिंदू समाज के व्यापक हित और संगठनात्मक समरसता से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा, “हिंदू समाज का सबसे बड़ा शत्रु जातिवादी व्यवहार है। बड़ी जातियों का झूठा अहंकार समाज को तोड़ रहा है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके मन में किसी भी व्यक्ति या वर्ग के प्रति कोई विद्वेष अथवा प्रतिशोध की भावना नहीं है।
समरसता ही उनका मिशन
तरुण विजय ने दोहराया कि उनका उद्देश्य हिंदू समाज को जातिवाद से मुक्त कर समरसता और समानता के भाव में एकजुट करना है। उनका कहना है कि सामाजिक एकता ही समाज की वास्तविक शक्ति है।
निष्कर्ष
सिलगुर देवता मंदिर प्रवेश हिंसा कांड एक बार फिर चर्चा में है और 19 दिसंबर की सुनवाई से इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय होने की उम्मीद है। नौ साल पुराने इस संवेदनशील प्रकरण में अब अदालत के समक्ष दर्ज होने वाले बयान न केवल न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे, बल्कि सामाजिक समरसता और समान अधिकारों पर भी नई बहस को जन्म दे सकते हैं।






