BREAKING

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव तोड़ रहा पारिवारिक ताना-बाना, राज्य महिला आयोग ने जताई गहरी चिंता

देहरादून, उत्तराखंड | दिनांक: 10 फरवरी 2025

आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया की तेज़ रफ्तार ने जहां जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं इसके दुष्प्रभाव अब समाज और परिवारों की जड़ों को कमजोर करने लगे हैं। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने सोशल मीडिया के बढ़ते नकारात्मक प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे पारिवारिक विघटन और सामाजिक पतन का बड़ा कारण बताया है।


नई पीढ़ी सोशल मीडिया की चकाचौंध में भटक रही: कुसुम कंडवाल

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चे सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में इस कदर उलझते जा रहे हैं कि वे अपनी संस्कृति, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या की सबसे बड़ी वजह परिवारों में संवाद और समन्वय की कमी है।


अनजान संपर्क, साइबर अपराध और अनैतिक रिश्तों का बढ़ता खतरा

कुसुम कंडवाल ने अपने अनुभव और विश्लेषण के आधार पर बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से अनजान लोगों से बढ़ता संपर्क महिलाओं और बेटियों को साइबर अपराध और अनैतिक रिश्तों की ओर धकेल रहा है।
उन्होंने कहा कि “डिजिटल फ्रेंडशिप” के नाम पर पनप रहे ये अवैध संबंध न केवल वैवाहिक जीवन को तोड़ रहे हैं, बल्कि मासूम जिंदगियों को भी गलत दिशा में ले जा रहे हैं।


मोबाइल की दुनिया में सिमटते रिश्ते

आयोग अध्यक्ष ने चिंता जताई कि आज बच्चों का अपने माता-पिता और बुजुर्गों से संवाद बेहद सीमित हो गया है। मोबाइल फोन की स्क्रीन में डूबी नई पीढ़ी एक काल्पनिक दुनिया को ही अपना सच मान बैठी है। इसका परिणाम यह है कि घर-परिवार से भावनात्मक जुड़ाव कमजोर होता जा रहा है, जो आगे चलकर गंभीर सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रहा है।


लिव-इन जैसे रिश्तों की ओर बढ़ती युवा पीढ़ी

कुसुम कंडवाल ने विशेष रूप से उन बेटियों की स्थिति पर चिंता जताई जो पढ़ाई या नौकरी के लिए घर से दूर रहती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कई लड़कियां सोशल मीडिया के जरिए अनजान लोगों के संपर्क में आकर बिना भविष्य सोचे लिव-इन जैसे रिश्तों में बंध जाती हैं, जिनका अंत अक्सर दुखद और असफल होता है। इसका असर केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है।


माता-पिता से विशेष अपील

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के दोस्त की भूमिका निभाते हुए उनकी दिनचर्या, संगत और व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए। मजबूत भावनात्मक रिश्ता और सक्रिय निगरानी ही बच्चों को इस डिजिटल दलदल से बाहर निकाल सकती है।


“स्क्रीन की चमक से रिश्ते नहीं चमकते”

महिलाओं और बेटियों को संदेश देते हुए कुसुम कंडवाल ने कहा—
“स्क्रीन की चमक से रिश्ते नहीं चमकते। रिश्तों की असली चमक अपनों के साथ समय बिताने और संवाद से आती है। तकनीक का उपयोग अपनी उन्नति, संस्कृति और संस्कारों को समझने के लिए करें।”


जागरूकता अभियान चलाएगा महिला आयोग

राज्य महिला आयोग ने स्पष्ट किया कि वह इस विषय पर संज्ञान लेते हुए महिलाओं, बेटियों, अभिभावकों और समाज के सभी वर्गों को जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयास करेगा। आयोग और सरकार महिलाओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन परिवारों की सक्रिय भूमिका भी उतनी ही आवश्यक है।


निष्कर्ष

सोशल मीडिया जहां सूचना और संवाद का सशक्त माध्यम है, वहीं इसका अंधाधुंध और असंतुलित उपयोग समाज के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। राज्य महिला आयोग की चेतावनी स्पष्ट है—यदि समय रहते परिवारों में संवाद, संस्कार और समन्वय को मजबूत नहीं किया गया, तो डिजिटल दुनिया की यह चकाचौंध हमारी सामाजिक नींव को और कमजोर कर देगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *