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हाईकोर्ट से अंतरिम राहत के बाद पूर्व विधायक सुरेश राठौर की घर वापसी, बोले– अंकिता के नाम पर कांग्रेस कर रही राजनीति

हरिद्वार | उत्तराखंड
दिनांक: 09 जनवरी 2026

उत्तराखंड की राजनीति में चर्चित नाम रहे पूर्व विधायक सुरेश राठौर को बहादराबाद थाने में दर्ज रिपोर्ट के मामले में हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद बड़ी राहत मिली है। राहत के बाद राठौर बृहस्पतिवार को हरिद्वार लौट आए और ज्वालापुर स्थित अपने आवास पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मीडिया के सामने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि न्याय की लड़ाई सच्चाई सामने आने तक जारी रहेगी।


खुद को बताया निर्दोष, न्याय पर जताया भरोसा

अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में सुरेश राठौर ने कहा कि वे पूरी तरह आश्वस्त हैं कि अंततः न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और सच्चाई देर-सबेर सामने आएगी।
राठौर ने स्पष्ट किया कि वे किसी दबाव में नहीं हैं और कानूनी प्रक्रिया पर पूरा भरोसा रखते हैं।


भगवा वस्त्र न पहनने का लिया संकल्प

पूर्व विधायक ने अपनी निजी आस्था और संकल्प का हवाला देते हुए कहा कि जब तक उन्हें पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे भगवा वस्त्र धारण नहीं करेंगे।
उन्होंने इसे अपनी आंतरिक भावना और आत्मिक निर्णय बताया, जिसे किसी राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।


अंकिता भंडारी मामले पर कांग्रेस पर साधा निशाना

अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर सुरेश राठौर ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जानबूझकर अंकिता के नाम पर राजनीति कर रही है और जनभावनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है।
राठौर का आरोप है कि समाज और प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई और इसमें उर्मिला के बयानों की भी अहम भूमिका रही, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई।


सोची-समझी साजिश का आरोप

राठौर ने दावा किया कि उनके खिलाफ दर्ज रिपोर्ट एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि न सिर्फ उन्हें, बल्कि उनके साथियों को भी मामले में घसीटने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही रविदास पीठ की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।


वायरल ऑडियो पर उठाए सवाल, तकनीकी जांच की मांग

वायरल ऑडियो को लेकर पूर्व विधायक ने कहा कि आज के तकनीकी युग में एआई के माध्यम से आवाज तैयार करना संभव है
उन्होंने मांग की कि ऑडियो की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई स्पष्ट हो सके।
राठौर ने यह भी कहा कि उन्होंने न तो किसी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और न ही किसी का अपमान किया है।


11 दिन तक रहे थे सार्वजनिक जीवन से दूर

गौरतलब है कि 27 दिसंबर को बहादराबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पूर्व विधायक सुरेश राठौर करीब 11 दिनों तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद उनकी वापसी को राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है।


निष्कर्ष

हाईकोर्ट से अंतरिम राहत के बाद सुरेश राठौर की घर वापसी ने एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति को गरमा दिया है। जहां राठौर खुद को निर्दोष बताते हुए न्याय की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस और अन्य दलों के आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। आने वाले दिनों में अदालत और जांच की दिशा ही यह तय करेगी कि इस मामले में सच्चाई किस रूप में सामने आती है।

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