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हिमाचल रोडवेज बस हादसा: जर्जर पुश्ता ढहने से 100 मीटर गहरी खाई में गिरी बस, तीन की मौत, 33 घायल

 

कालसी/साहिया (उत्तराखंड-हिमाचल सीमा)
दिनांक: 4 फरवरी 2026

उत्तराखंड-हिमाचल सीमा से एक बार फिर दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। हिमाचल प्रदेश के चौपाल से पांवटा साहिब आ रही हिमाचल रोडवेज की यात्री बस मंगलवार को हरिपुर-कोटी-क्वानू-मीनस राज्य राजमार्ग पर सुदोई खड्ड के पास अनियंत्रित होकर करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। बस में कुल 36 यात्री सवार थे, जिनमें से तीन यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 33 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब कालसी की ओर से आ रहे एक ट्रक को पास देने के दौरान सड़क किनारे बना पुश्ता अचानक ढह गया। पुश्ता धंसते ही बस का संतुलन बिगड़ गया और वह गहरी खाई में समा गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत व बचाव कार्य शुरू किया।


राजमार्ग की बदहाली बनी हादसे की बड़ी वजह


व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हरिपुर-कोटी-क्वानू-मीनस राज्य राजमार्ग लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाला लगभग 72 किलोमीटर लंबा यह अंतरराज्यीय मोटर मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। मार्ग का करीब 30 किलोमीटर हिस्सा डेढ़ लेन का है, जबकि इसके आगे का पूरा मार्ग सिंगल लेन में सिमटा हुआ है, जिससे वाहनों की आवाजाही हमेशा जोखिम भरी बनी रहती है।


इस मोटर मार्ग पर जगह-जगह पुश्ते और रिटेनिंग वॉल्स जर्जर अवस्था में हैं। दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील इस पूरे मार्ग पर क्रैश बैरियर की भारी कमी है। बैरियर न होने के कारण हर वर्ष यहां कई गंभीर सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।


आर्थिक गतिविधियों की जीवनरेखा है यह मार्ग


जौनसार-बावर क्षेत्र के प्रवेश द्वार हरिपुर कालसी से होकर गुजरने वाला यह मार्ग देश की प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं—छिबरौ, कोटी और इच्छाड़ी—को जोड़ता है। इस मार्ग से दिन-रात निजी, मालवाहक और यात्री वाहन गुजरते हैं। इसके अलावा उत्तराखंड के त्यूणी-बावर और हिमाचल प्रदेश के शिमला, रोहड़ू जैसे सेब व अन्य फल उत्पादक क्षेत्रों से काश्तकार और बागवान अपनी नकदी फसलें लेकर सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और दिल्ली की मंडियों तक पहुंचते हैं।


हादसे के बाद जागता है सिस्टम


दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि बड़े हादसों के बाद ही शासन-प्रशासन हरकत में आता है, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि केवल संवेदनाएं व्यक्त कर औपचारिकता निभाते नजर आते हैं। स्थायी मरम्मत, सड़क चौड़ीकरण और क्रैश बैरियर लगाए जाने जैसे गंभीर मुद्दों पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।


शासन और जनप्रतिनिधियों की इस उपेक्षा का खामियाजा आए दिन उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लोगों को जान-माल की क्षति के रूप में भुगतना पड़ रहा है।


लोक निर्माण विभाग का बयान


लोक निर्माण विभाग, साहिया डिवीजन की अधिशासी अभियंता रचना थपलियाल ने बताया कि जिन स्थानों पर क्रैश बैरियर नहीं हैं, वहां बैरियर लगाए जाने के लिए इस्टीमेट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजा जा रहा है। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त हिस्सों में मोटर मार्ग की मरम्मत कराए जाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।


निष्कर्ष


हिमाचल रोडवेज बस हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक जर्जर सड़कों और लापरवाह व्यवस्था की कीमत आम लोग अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे। यदि समय रहते इस महत्वपूर्ण अंतरराज्यीय मोटर मार्ग का चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और सुरक्षा इंतजाम किए गए होते, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टल सकता था। अब जरूरत है कि शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि संवेदनाओं से आगे बढ़कर ठोस और स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर कदम उठाएं।

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