देहरादून | 12 सितंबर 2026
देहरादून के डोईवाला क्षेत्र स्थित झबरावाला गांव में हाथी के हमले से एक ग्रामीण की मौत हो गई। शुक्रवार रात खेतों के पास अचानक सामने आए हाथी ने ग्रामीण को अपनी चपेट में ले लिया। गंभीर रूप से घायल ग्रामीण को उपचार के लिए हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद झबरावाला और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ नाराजगी भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार हाथियों की आवाजाही बढ़ रही है और अब वन्यजीव आबादी के नजदीक तक पहुंचने लगे हैं।
स्कूटी से घर लौट रहे थे दोनों ग्रामीण
जानकारी के मुताबिक मृतक की पहचान 55 वर्षीय जमील पुत्र असगर अली के रूप में हुई है। शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे जमील अपने साथी नफीस के साथ स्कूटी से घर लौट रहे थे।
गांव के खेतों के पास हाथीकुंड क्षेत्र में अचानक उनके सामने हाथी आ गया। हाथी को सामने देखकर दोनों घबरा गए और वहां से बचकर भागने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान हाथी ने जमील को अपनी चपेट में ले लिया।
हाथी ने जमील को उठाकर जमीन पर पटक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
साथी ने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया
हमले के बाद स्कूटी चला रहे नफीस ने तत्काल शोर मचाकर आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाया। ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल जमील को किसी तरह वहां से निकालकर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।
जमील को उपचार के लिए हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट ले जाया गया। चिकित्सकों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही कांसरो वन रेंज के अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर ग्रामीणों से घटना की जानकारी ली।
हाथियों की बढ़ती आवाजाही से ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि झबरावाला और आसपास के क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ती जा रही है। कई बार हाथी सुरक्षा दीवार को पार कर या उसे तोड़कर खेतों और आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं।
इससे ग्रामीणों के सामने फसल के नुकसान के साथ-साथ जान का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय खेतों और रास्तों पर निकलना मुश्किल हो गया है।
जमील की मौत के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति आक्रोश और बढ़ गया है। ग्रामीणों ने हाथियों की आबादी वाले क्षेत्रों में आवाजाही रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
खेती और मजदूरी कर परिवार चलाते थे जमील
ग्राम प्रधान परमिंदर सिंह के अनुसार जमील करीब 55 वर्ष के थे। वह खेती-किसानी के साथ मजदूरी का काम भी करते थे और इसी के जरिए अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे।
ग्राम प्रधान ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि हाथियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग को क्षेत्र में सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल घटना के बाद मौके पर पहुंचना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हाथियों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए दीर्घकालिक समाधान जरूरी है।
परिवार को मुआवजा देने की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने वन विभाग से मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की अपील की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। आबादी के आसपास हाथियों की निगरानी बढ़ाने और ग्रामीणों को समय रहते सूचना देने की व्यवस्था की भी मांग की गई है।
शव के पोस्टमार्टम की कार्रवाई जारी
मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। वन विभाग की टीम घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रही है। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मृतक के परिवार की आर्थिक मदद करने के साथ क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
निष्कर्ष
झबरावाला गांव में हाथी के हमले से हुई जमील की मौत ने एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। खेतों और आबादी के आसपास लगातार हाथियों की मौजूदगी ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। ग्रामीण अब वन विभाग से सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जिससे भविष्य में किसी और परिवार को अपने सदस्य को इ


