स्थान: देहरादून | दिनांक: 5 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी की एसआईआर कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक मनोज रावत ने आरोप लगाया कि राज्य में करीब 14 प्रतिशत मतदाताओं के नाम काटे जाना सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि वोट चोरी की बड़ी वारदात है। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले को लेकर कांग्रेस अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।
देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में मनोज रावत ने दावा किया कि प्री-एसआईआर और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उत्तराखंड में करीब 13.85 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे राज्य में इतनी बड़ी संख्या में वोट काटे जाना गंभीर चिंता का विषय है। रावत के मुताबिक, निर्वाचन आयोग अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि प्री-एसआईआर और एसआईआर के दौरान कुल कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसकी वास्तविक स्थिति क्या है।
पूर्व विधायक ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए फॉर्म-7 के ऑटो जनरेट होने, भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से की गई कथित शिकायतों को स्वीकार किए जाने और शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने जैसे मुद्दे भी उठाए। उनका आरोप है कि इन घटनाओं से यह संदेह मजबूत होता है कि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के मामले में निर्वाचन आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत रही है।
हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
मनोज रावत ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल एजेंटों की सतर्कता के कारण निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के बीएलओ ने लगातार निगरानी रखी, जिसके चलते उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूचियों में शामिल हो सके।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और इसमें किसी भी पात्र नागरिक का नाम हटना गंभीर विषय है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन कारणों से मतदाताओं के नाम हटाए गए।
रावत ने एसआईआर के बाद नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए फार्म-6 के जरिए अपनाई जा रही प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे मौजूदा परिस्थितियों में असंगत बताते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों तथा आम लोगों के सामने स्पष्ट जानकारी रखी जानी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने दोहराया कि पार्टी इस पूरे मामले को केवल राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर न्यायालय में भी इसे उठाएगी। उनका कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर कांग्रेस कानूनी रास्ता अपनाने के लिए तैयार है।
निष्कर्ष: उत्तराखंड में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस और निर्वाचन प्रक्रिया के बीच विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी लड़ाई की ओर जाता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने जहां बड़ी संख्या में नाम काटे जाने पर सवाल उठाए हैं, वहीं अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि निर्वाचन आयोग इन आरोपों और आंकड़ों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।


