देहरादून | 6 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थयात्रा के दौरान बढ़ने वाली पार्किंग की समस्या से लोगों को राहत दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। परिवहन विभाग एक ऐसा पार्किंग ऐप विकसित कर रहा है, जिसके माध्यम से वाहन चालक अपने मोबाइल से आसपास उपलब्ध पार्किंग स्थलों की जानकारी देख सकेंगे। इतना ही नहीं, खाली जगह उपलब्ध होने पर पार्किंग स्पेस की पहले से बुकिंग भी की जा सकेगी।
इस सुविधा का सबसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देहरादून में इस्तेमाल किया जाएगा। व्यवस्था सफल रहने पर इसे प्रदेश के दूसरे प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों तक विस्तार देने की योजना है।
पर्यटन सीजन में सबसे बड़ी परेशानी पार्किंग
उत्तराखंड में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी समेत चारधाम यात्रा मार्गों पर सीजन के दौरान वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को काफी देर तक वाहन खड़ा करने के लिए जगह तलाशनी पड़ती है।
कई बार पार्किंग नहीं मिलने पर वाहन सड़क किनारे खड़े कर दिए जाते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और जाम की स्थिति भी पैदा हो जाती है। देहरादून के घंटाघर, प्रमुख बाजारों और पर्यटन स्थलों के आसपास यह समस्या लंबे समय से चुनौती बनी हुई है।
ऐप पर रियल टाइम में दिखेगी पार्किंग की स्थिति
परिवहन विभाग की ओर से तैयार किए जा रहे ऐप में पार्किंग स्थलों की रियल टाइम उपलब्धता दिखाई जाएगी। वाहन चालक घर से निकलने से पहले ही यह देख सकेगा कि उसके गंतव्य के आसपास कौन-कौन सी पार्किंग उपलब्ध है और किस पार्किंग में कितनी जगह खाली है।
इसके साथ ही ऐप में प्री-बुकिंग की सुविधा भी प्रस्तावित है। यानी जिस तरह लोग होटल का कमरा पहले से बुक करते हैं, उसी तरह पार्किंग स्पेस भी पहले से आरक्षित किया जा सकेगा।
ऐप में जीपीएस नेविगेशन की सुविधा भी जोड़ी जाएगी, जिससे वाहन चालक को चुनी गई पार्किंग तक पहुंचने का रास्ता आसानी से मिल सके।
पार्किंग फुल होने पर मिलेगा दूसरा विकल्प
इस व्यवस्था की खासियत यह होगी कि यदि किसी पार्किंग स्थल में जगह उपलब्ध नहीं है तो वाहन चालक को परेशान होकर दूसरी जगह तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐप के माध्यम से आसपास मौजूद वैकल्पिक पार्किंग स्थलों की जानकारी मिल सकेगी।
इससे पार्किंग की तलाश में सड़कों पर अनावश्यक रूप से घूमने वाले वाहनों की संख्या कम होने की उम्मीद है। इसका सीधा असर ट्रैफिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
देहरादून में पहले भी शुरू हुई थी ऐप आधारित पार्किंग
देहरादून में स्मार्ट पार्किंग की दिशा में पहले भी प्रयास हो चुके हैं। एमडीडीए और स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कुछ साल पहले ‘mPark’ ऐप के माध्यम से 27 स्थानों पर ऐप आधारित पार्किंग व्यवस्था शुरू की गई थी।
हालांकि, यह व्यवस्था अपेक्षित तरीके से प्रभावी नहीं हो सकी और बाद में पार्किंग का संचालन मुख्य रूप से ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर होता रहा। अब परिवहन विभाग पुराने अनुभवों को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर नई व्यवस्था विकसित करने में जुटा है।
सरकारी और निजी पार्किंग को ऐप से जोड़ने की तैयारी
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार कोशिश की जा रही है कि राज्य में मौजूद अधिक से अधिक सरकारी और निजी पार्किंग स्थलों को इस ऐप से जोड़ा जाए।
इसके साथ ही परिवहन विभाग पार्किंग को लेकर एक नीति तैयार करने पर भी काम कर रहा है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र में नई पार्किंग विकसित करने के लिए आवश्यक प्रावधान तय करना और पार्किंग शुल्क को भी नियमन के दायरे में लाना है।
सनत कुमार सिंह के मुताबिक, ऐप को विकसित करने के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पहले देहरादून में इसका परीक्षण होगा और सफलता मिलने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
दो से तीन महीने में लॉन्च करने की तैयारी
परिवहन विभाग की योजना के अनुसार पार्किंग ऐप को अगले दो से तीन महीनों में तैयार कर लॉन्च करने का लक्ष्य है। देहरादून में इसके संचालन के बाद शुरुआती महीनों में लोगों से मिलने वाले फीडबैक और व्यवस्था की उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।
यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो बाद में इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। खासकर देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी और चारधाम यात्रा से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।
ट्रैफिक जाम और अवैध पार्किंग पर भी पड़ेगा असर
नई पार्किंग व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ वाहन खड़ा करने के लिए जगह उपलब्ध कराना नहीं है। विभाग को उम्मीद है कि इससे सड़क किनारे होने वाली अनधिकृत पार्किंग में कमी आएगी और पार्किंग की तलाश में सड़कों पर घूमने वाले वाहनों के कारण होने वाला ट्रैफिक दबाव भी घटेगा।
इसके अलावा पार्किंग शुल्क, उपलब्ध स्थान और वैकल्पिक पार्किंग की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलने से वाहन चालकों को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक व्यवस्था मिल सकेगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन और वाहनों की संख्या के बीच पार्किंग व्यवस्था को डिजिटल बनाने की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर देहरादून में शुरू होने वाला पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो राज्य के प्रमुख पर्यटन और तीर्थस्थलों पर पार्किंग की तलाश में होने वाली परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि परिवहन विभाग का नया पार्किंग ऐप कब तक तैयार होता है और जमीन पर यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।


