स्थान: पिथौरागढ़, उत्तराखंड | दिनांक: 9 अक्टूबर 2026
पिथौरागढ़ जिले के थल थाना क्षेत्र में भरोसे के रिश्ते को शर्मसार करने का मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग मकान मालिक ने अपने किरायेदार पर विश्वास करते हुए उसे मोबाइल फोन और PhonePe का पिन बता दिया। आरोप है कि किरायेदार ने इसी भरोसे का फायदा उठाकर करीब डेढ़ महीने तक उनके बैंक खाते से पैसे निकालकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए। पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
26 बार में खाते से निकाले 1,36,588 रुपये
पुलिस के अनुसार, कोटगाड़ी निवासी 65 वर्षीय गोविन्द बल्लभ जोशी ने 7 अक्टूबर 2026 को थल थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके बैंक खाते से UPI और PhonePe के माध्यम से 26 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 1,36,588 रुपये ट्रांसफर किए गए हैं।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। थानाध्यक्ष गणेश भट्ट के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बैंक स्टेटमेंट और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम शुभम राय, किरन देवी, प्रिया कुमारी और गीता देवी के बैंक खातों में भेजी गई थी।
छह महीने से किराये पर रह रहा था आरोपी
जांच के दौरान पुलिस को बुजुर्ग के घर में पिछले छह महीने से किराये पर रह रहे मजदूर रुदल महतो पर शक हुआ। आरोपी की उम्र 35 वर्ष है और वह मूल रूप से बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले का निवासी है। वह कोटगाड़ी में रहकर टाइल लगाने का काम करता था।
बताया गया कि बुजुर्ग मकान मालिक और किरायेदार के बीच अच्छी जान-पहचान हो गई थी। बाजार से सामान मंगाने जैसे छोटे-मोटे कामों के लिए गोविन्द बल्लभ जोशी अक्सर उसे अपना मोबाइल फोन दे देते थे। इसी दौरान आरोपी को उनके मोबाइल का पासवर्ड और PhonePe PIN भी पता चल गया।
आरोप है कि उसने इस जानकारी का गलत इस्तेमाल करते हुए बुजुर्ग के खाते से रकम ट्रांसफर करनी शुरू कर दी। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने ठगी की बात स्वीकार कर ली।
पत्नी के खाते में भेजे 67 हजार रुपये
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी ने 20 अगस्त से 6 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 1,36,588 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए। इनमें से 67 हजार रुपये अपनी पत्नी किरन देवी के खाते में भेजे, जबकि 48 हजार रुपये कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किए। शेष रकम के लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
थल पुलिस ने आरोपी को शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन और ठगी की रकम में से 7 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
हरिद्वार में चोरी के जेवरात गिरवी रखकर लिया गोल्ड लोन
इसी बीच, हरिद्वार जिले के मंगलौर में चोरी के जेवरात को ठिकाने लगाने का एक अलग मामला सामने आया है। मंगलौर कोतवाली पुलिस ने लाखों रुपये के गहनों की चोरी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने चोरी के गहने बेचने के बजाय दिल्ली जाकर एक गोल्ड लोन कंपनी में गिरवी रख दिए और इसके बदले 2 लाख 51 हजार 200 रुपये का ऋण ले लिया। हालांकि, वह पुलिस की कार्रवाई से बच नहीं सका।
हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार के तहत मंगलौर पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस ने दिल्ली के भजनपुरा स्थित गोल्ड लोन कंपनी से चोरी के शेष जेवरात बरामद कर लिए हैं।
निष्कर्ष
पिथौरागढ़ और हरिद्वार के ये मामले बताते हैं कि विश्वास का दुरुपयोग कर आर्थिक अपराध करने वाले आरोपियों के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। खासकर मोबाइल बैंकिंग और UPI के इस्तेमाल में सावधानी बरतना जरूरी है। अपना PIN, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी दूसरे व्यक्ति को मोबाइल देने से पहले बैंकिंग ऐप को सुरक्षित रखें।
अपील: यदि आपके बैंक खाते में कोई संदिग्ध लेन-देन दिखाई देता है, तो तुरंत अपने बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।


