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उत्तराखंड में ई-चालान तो धड़ाधड़ कट रहे, लेकिन जुर्माना वसूलने में छूट रहे पसीने; अब बकायेदारों पर सख्ती की तैयारी

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड | दिनांक: 13 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर परिवहन विभाग और पुलिस लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। शहरों से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक लगे एएनपीआर कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के ई-चालान किए जा रहे हैं। लेकिन कार्रवाई के बाद जुर्माना जमा कराने में विभागों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में हजारों ई-चालान लंबित हैं, जिसके चलते अब बकाया वसूली के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।

चालान काटना आसान, भुगतान कराना मुश्किल

सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग और पुलिस की ओर से चालान काटने के साथ ही वाहनों को सीज करने की कार्रवाई भी की जा रही है। इसके अलावा, एएनपीआर कैमरों के जरिए नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों की पहचान कर ऑनलाइन चालान भेजे जा रहे हैं।

हालांकि, ऑफलाइन चालान होने पर जहां कई वाहन चालक मौके पर या बाद में जुर्माना जमा कर देते हैं, वहीं ई-चालान के मामलों में बड़ी संख्या में लोग भुगतान नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि ई-चालान की बढ़ती संख्या के बावजूद जुर्माने की वसूली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है।

यह समस्या केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। देश के दूसरे राज्यों में भी ई-चालान का भारी बकाया लंबित है। इसी स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चालान जारी करने के साथ-साथ उनकी वसूली सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हुई चर्चा

देहरादून में 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई थी। इसमें सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ ई-चालान की बकाया राशि वसूलने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के मुताबिक, बैठक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने पर विचार किया गया। इसके तहत बकाया ई-चालान वाले वाहनों की आरसी के नवीनीकरण, डुप्लीकेट आरसी जारी करने, वाहन स्वामी का पता बदलने और वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित करने जैसी सेवाओं पर रोक लगाने के विकल्पों पर चर्चा की गई।

विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन चालकों को यातायात नियमों का उल्लंघन करने के बाद जुर्माना जमा करने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़े।

ई-चालान बकाया होने पर इन सेवाओं पर लग सकती है रोक

बकाया जुर्माने की वसूली के लिए जिन उपायों पर जोर दिया जा रहा है, उनमें वाहन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाओं को प्रतिबंधित करना शामिल है।

  • वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) का नवीनीकरण और डुप्लीकेट आरसी जारी करने पर रोक।
  • वाहन स्वामी का पता बदलने और वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित करने की प्रक्रिया रोकना।
  • फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी करने पर प्रतिबंध लगाने का विकल्प।
  • बकाया ई-चालान वाले वाहन को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करना।
  • बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने पर विचार।
  • जांच के दौरान बकाया चालान मिलने पर नियमानुसार वाहन जब्त करने की कार्रवाई।

इन उपायों का उद्देश्य चालान की वसूली को प्रभावी बनाना है। हालांकि, इन सभी प्रतिबंधों को उत्तराखंड में लागू करने की अंतिम व्यवस्था संबंधित आदेशों और नियमों के अनुरूप तय होगी।

देशभर में 49 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के ई-चालान लंबित

28 सितंबर 2026 को जारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ई-चालान के मद में लगभग 49,194 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जानी थी। इसमें से करीब 26,175 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके, जबकि लगभग 23,019 करोड़ रुपये की राशि अब भी बकाया थी।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बड़ी संख्या में चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है। यातायात नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए जुर्माने की वसूली भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

उत्तराखंड के आंकड़े भी इसी चुनौती को दर्शाते हैं।

उत्तराखंड में 2 लाख से ज्यादा ई-चालान, भुगतान 19 प्रतिशत से भी कम

परिवहन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में अगस्त तक प्रदेश में एएनपीआर कैमरों के माध्यम से कुल 2,01,015 ई-चालान किए गए। इनमें से केवल 37,755 चालानों का ही जुर्माना जमा हुआ।

इसका मतलब है कि कुल चालानों में से लगभग 18.8 प्रतिशत मामलों में भुगतान हुआ, जबकि 1,63,260 चालानों का जुर्माना जमा नहीं हुआ था।

जिलावार आंकड़े भी भुगतान की कम दर को सामने लाते हैं।

एएनपीआर कैमरों से हुए चालान और भुगतान की स्थिति

जिलाकुल ई-चालानभुगतान किए गए चालान
देहरादून61,25813,477
ऊधम सिंह नगर63,85410,845
हरिद्वार42,5234,265
नैनीताल22,0075,603
टिहरी गढ़वाल3,8461,585
पौड़ी गढ़वाल1,565549
चंपावत5,9621,431
कुल2,01,01537,755

आंकड़ों के मुताबिक, ऊधम सिंह नगर में सबसे अधिक 63,854 ई-चालान किए गए, जबकि देहरादून 61,258 चालानों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। हरिद्वार में भी 42 हजार से अधिक चालान दर्ज किए गए।

दूसरी ओर, हरिद्वार में 42,523 चालानों के मुकाबले केवल 4,265 चालानों का भुगतान हुआ। इससे स्पष्ट है कि चालान जारी करने के बाद उनकी वसूली सुनिश्चित करना विभाग के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और ई-चालान व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सड़क सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और ई-चालान व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 28 अक्टूबर 2025 की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A के अनुपालन पर भी जोर दिया गया है।

उत्तराखंड परिवहन विभाग अब इन्हीं निर्देशों और सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हुई चर्चा के अनुरूप बकाया वसूली की रणनीति तैयार कर रहा है। इसमें वाहन से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने और नियमों के तहत कार्रवाई करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

हालांकि, इन उपायों को किस तरह और किन परिस्थितियों में लागू किया जाएगा, यह संबंधित आदेशों और विभागीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में ई-चालान की बढ़ती संख्या के बावजूद जुर्माने की कम वसूली सड़क सुरक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती बन गई है। वर्ष 2026 में अगस्त तक जारी 2,01,015 चालानों में से केवल 37,755 का भुगतान होना बताता है कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। अब परिवहन विभाग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप बकायेदार वाहन चालकों पर सख्ती करने की तैयारी में है। आने वाले समय में वाहन से जुड़ी सेवाओं पर संभावित प्रतिबंध और प्रभावी निगरानी व्यवस्था ई-चालान की वसूली में कितनी मददगार साबित होगी, इस पर नजर रहेगी।

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