हरिद्वार, 15 अक्टूबर 2026
त्योहार पर अपने घर जाने की तैयारी कर रहे दो मजदूरों को हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर ठगी का शिकार बना लिया गया। आरोप है कि बिहार के पांच युवकों ने खुद को रेलवे कर्मचारियों का रिश्तेदार बताकर जनरल टिकट को एसी थर्ड कोच में बदलवाने का झांसा दिया। आरोपियों ने मजदूरों से नकदी, मोबाइल फोन और बैग लेने के बाद उनके बैंक खातों से भी रकम निकाल ली। मामले में जीआरपी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी यात्रियों का विश्वास जीतने के लिए कहते थे कि उनके मामा रेलवे में टीटी हैं और वे जनरल टिकट को एसी कोच के टिकट में बदलवा सकते हैं। इसी बहाने वे यात्रियों को अपने जाल में फंसाते और फिर उनके सामान व बैंक खातों को निशाना बनाते थे।
त्योहार पर घर लौट रहे मजदूरों को बनाया निशाना
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के निवासी बिस्वजीत सौरेन और रंजीत कोरा 10 अक्टूबर की रात हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। दोनों पिछले करीब एक साल से हरिद्वार में दिहाड़ी मजदूरी कर रहे थे। दशहरा और दीपावली पर परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए उन्होंने कुंभ एक्सप्रेस से आसनसोल जाने के जनरल टिकट खरीदे थे।
दोनों मजदूर कई महीनों से मेहनत करके अपने परिवार और बच्चों के लिए पैसे बचा रहे थे। ट्रेन का इंतजार करते समय उनकी मुलाकात दो युवकों से हुई। बातचीत के दौरान युवकों ने बताया कि वे भी बिहार जा रहे हैं और उनके मामा रेलवे में टीटी हैं। उन्होंने दावा किया कि वे दोनों मजदूरों के जनरल टिकट को एसी थर्ड कोच के टिकट में बदलवा सकते हैं।
आरोपियों ने बिहारी भाषा में बातचीत कर मजदूरों का भरोसा जीता। इसके बाद उन्होंने अपने एक अन्य साथी से मुलाकात कराई, जो रेलवे कर्मचारी यानी टीटी की तरह बात कर रहा था।
रेलवे के नियम बताकर जमा करा लिया सामान
गिरोह के सदस्यों ने मजदूरों को बताया कि एसी कोच में यात्रा करने के लिए रेलवे के कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि यात्रियों को अपना मोबाइल फोन, नकदी और अन्य सामान जमा कराना होगा। इसके बदले उन्हें रसीद दी जाएगी और गंतव्य पर सामान वापस मिल जाएगा।
आरोपियों की बातों में आकर दोनों मजदूरों ने करीब 12 हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन, बैग और कपड़े उनके हवाले कर दिए। इसके बाद वे बताए गए स्थान पर बैठकर रसीद मिलने का इंतजार करते रहे। लेकिन आरोपी सामान लेकर वहां से फरार हो गए।
अगले दिन जब मजदूरों ने अपने बैंक खातों की जानकारी ली तो पता चला कि उनके खातों से कुल 90,500 रुपये निकाले जा चुके हैं। ठगी का एहसास होने पर दोनों पीड़ित जीआरपी हरिद्वार पहुंचे और पुलिस को पूरी घटना बताई।
पांच आरोपी मिलकर चलाते थे ठगी का खेल
जीआरपी की जांच में सामने आया कि आरोपी योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम देते थे। गिरोह के दो सदस्य रेलवे स्टेशन पर सीधे-सादे यात्रियों की पहचान कर उनसे दोस्ताना बातचीत शुरू करते थे। इसके बाद रेलवे कर्मचारी का रिश्तेदार होने का दावा करते हुए तीसरे साथी को सामने लाया जाता था।
यह साथी टीटी की तरह व्यवहार करता और रेलवे के नियमों की जानकारी होने का दिखावा करता था। फिर गिरोह के अन्य सदस्य यात्रियों को एसी कोच में यात्रा कराने का भरोसा दिलाकर उनका सामान और नकदी अपने कब्जे में ले लेते थे।
पुलिस के अनुसार, सामान लेने के दौरान आरोपियों को यात्रियों के मोबाइल का पिन कोड भी पता चल जाता था। इसके बाद वे बैंक खातों से रुपये निकालकर फरार हो जाते थे। त्योहारों के दौरान रेलवे स्टेशनों पर बढ़ने वाली भीड़ का फायदा उठाना भी उनकी योजना का हिस्सा था।
सीसीटीवी और मुखबिरों की मदद से 30 घंटे में गिरफ्तारी
पीड़ितों की शिकायत पर जीआरपी ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। इंस्पेक्टर विपिन पाठक के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई। सीओ अनुज के नेतृत्व में पुलिस ने मैन्युअल पुलिसिंग, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की तलाश की।
पीड़ितों द्वारा बताए गए हुलिए, कपड़ों और बातचीत के तरीके के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई। पुलिस के मुताबिक, घटना के करीब 30 घंटे के भीतर पांचों आरोपियों को हरिद्वार रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी बिहार की ओर जाने वाली ट्रेन से भागने की फिराक में थे।
गिरफ्तार युवकों की पहचान सौरभ, सुमित कुमार, किशन कुमार, जितेंद्र कुमार चौधरी और बंटी कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिलों के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। उनकी उम्र 19 से 24 वर्ष के बीच बताई गई है।
नकदी, मोबाइल और बैग बरामद; रकम का कुछ हिस्सा फ्रीज
जीआरपी पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, पीड़ित का वनप्लस मोबाइल फोन और बैग बरामद किया है। इसके अलावा बैंक खातों से निकाली गई रकम में से 49,999 रुपये फ्रीज कराए गए हैं।
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि आरोपी महंगे मोबाइल फोन, बाइक और कपड़े खरीदने के लिए कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहते थे। बताया गया कि गिरोह के कुछ सदस्य मजदूरी करते थे, जबकि कुछ ऑटो चलाने, सब्जी बेचने और राजमिस्त्री का काम करते थे।
पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक इतिहास और इस तरह की अन्य घटनाओं में उनकी संभावित संलिप्तता की जानकारी जुटा रही है। गिरफ्तार पांचों आरोपियों को अदालत में पेश कर दिया गया है।
दीपावली से पहले पीड़ितों को रकम लौटाने का प्रयास
एसपी जीआरपी अरुणा भारती ने बताया कि गरीब मजदूरों की मेहनत की कमाई ठगने के मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि फ्रीज कराई गई रकम दीपावली से पहले पीड़ितों के खातों में वापस कराने का प्रयास किया जा रहा है।
त्योहारों के दौरान रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ने के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
यात्रियों के लिए जरूरी सावधानी: रेलवे स्टेशन पर कोई भी अनजान व्यक्ति यदि जनरल टिकट को एसी टिकट में बदलवाने, सामान जमा कराने या बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगने का दावा करे, तो उस पर भरोसा न करें। टिकट और यात्रा से संबंधित जानकारी केवल अधिकृत रेलवे कर्मचारियों से ही प्राप्त करें। किसी को भी अपने मोबाइल का पिन, बैंकिंग पासवर्ड या ओटीपी न बताएं।
निष्कर्ष
हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर हुई यह घटना बताती है कि ठग किस तरह यात्रियों के भरोसे का फायदा उठाकर उनकी मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर सकते हैं। बिहार के पांच युवकों की गिरफ्तारी से पुलिस को इस मामले में अहम सफलता मिली है, लेकिन पीड़ितों की पूरी रकम की वापसी और आरोपियों के अन्य संभावित अपराधों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। यात्रियों को चाहिए कि त्योहारों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतें और रेलवे से जुड़ी किसी भी सुविधा के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें।


