संदीप राठौर के पोस्ट से भड़का आक्रोश, पुलिस ने जांच शुरू की, इलाके में बढ़ाई गई सतर्कता
देहरादून, 31 जुलाई 2025
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बुधवार की रात उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई जब सोशल मीडिया पर एक युवक द्वारा कथित तौर पर पैगंबर साहब के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी वायरल हो गई। इससे नाराज़ लोगों की भीड़ ने आईएसबीटी पुलिस चौकी को घेर लिया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।
घटना के बाद शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है। आरोपी की पहचान संदीप राठौर के रूप में हुई है, जो सेलाकुई क्षेत्र का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, संदीप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पैगंबर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। यह मैसेज कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक पहुंच गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और नाराजगी भड़क उठी।
आईएसबीटी चौकी पर हंगामा, पुलिस ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
बुधवार देर शाम जैसे ही पोस्ट की जानकारी मुस्लिम समुदाय तक पहुंची, बड़ी संख्या में लोग आईएसबीटी पुलिस चौकी पर एकत्र हो गए। भीड़ ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की और गुस्से में नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को बिगड़ने से पहले पुलिस अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और भीड़ को शांत करने के लिए कार्रवाई का आश्वासन दिया।
एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए पटेलनगर थाने में संदीप राठौर के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश, इंटेलिजेंस भी सक्रिय
घटना को देखते हुए देहरादून पुलिस ने शहर में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। विशेष रूप से धार्मिक स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया है। स्थानीय इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) भी सोशल मीडिया गतिविधियों और जन भावनाओं पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी तरह की अफवाह या उत्तेजना से माहौल और न बिगड़े।
प्रशासन की अपील – अफवाहों से बचें, शांति बनाए रखें
पुलिस और प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या उकसावे में न आएं और सोशल मीडिया पर किसी भी भड़काऊ या अप्रमाणिक जानकारी को शेयर करने से बचें। शांति बनाए रखने में सभी की सहभागिता जरूरी है।
निष्कर्ष:
देहरादून में सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या डिजिटल मंचों पर बोलने की आज़ादी के साथ जिम्मेदारी का बोध भी होना जरूरी नहीं? प्रशासन की तत्परता ने इस बार स्थिति को काबू में रखा, लेकिन ऐसी घटनाएं यह चेतावनी जरूर देती हैं कि तकनीक के युग में शब्दों की ताकत और ज़िम्मेदारी दोनों को समझना बेहद जरूरी है।


