देहरादून | दिनांक: 5 फरवरी 2026
देहरादून के दुल्हा बाजार (मच्छी बाजार क्षेत्र) में हुए गुंजन हत्याकांड ने इंसानियत और सामाजिक संवेदनाओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस गली में दिनदहाड़े युवती पर जानलेवा हमला हुआ, वहां मौजूद दर्जनों लोग मूकदर्शक बने रहे। गुंजन की सहेली पायल का कहना है कि अगर आसपास खड़े लोग एकजुट होकर आगे आते, तो शायद आज गुंजन जिंदा होती।
“तू अगर मेरी नहीं हो सकती तो किसी की भी नहीं हो सकती”—फिल्मों में सुनाई देने वाला यह डायलॉग देहरादून में खौफनाक हकीकत बन गया। आरोपी आकाश ने इसी मानसिकता के साथ गुंजन को पहले धमकाया और फिर एकतरफा प्रेम में चापड़ से ताबड़तोड़ वार कर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
घटना के समय मच्छी बाजार इलाके में सुबह की चहल-पहल थी। बाजार खुल चुका था और गली के आसपास करीब 30 से 40 लोग मौजूद थे। चीख-पुकार सुनकर और भी लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन किसी ने भी गुंजन को बचाने की हिम्मत नहीं जुटाई। यह दर्दनाक बयान गुंजन की सहेली पायल का है, जो उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद थी।
पायल ने बताया कि गुंजन रोज की तरह गली में गाड़ी खड़ी करने गई थी। सब कुछ सामान्य लग रहा था। वह अक्सर घर के अंदर आकर उससे मिलती थी। सोमवार को भी दोनों की मुलाकात हुई थी, लेकिन जल्दबाजी के कारण गुंजन अंदर नहीं आई। कुछ ही देर बाद बाहर से चीखने की आवाज आई और वह दौड़कर बाहर पहुंची।
पायल के अनुसार, जब वह मौके पर पहुंची तो आकाश गुंजन पर लगातार चापड़ से हमला कर रहा था। उसने साहस जुटाकर आकाश को धक्का देकर हटाने की कोशिश की, लेकिन आकाश ने चापड़ उसकी ओर भी लहरा दिया। हथियार देखकर वह सिहर गई। इसके बावजूद उसने आसपास मौजूद लोगों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमले के बाद आकाश भीड़ के बीच से ही फरार हो गया। किसी ने न तो उसे पकड़ने की कोशिश की और न ही उसका रास्ता रोका। बाद में मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने भी इस बात की पुष्टि की कि आरोपी आसानी से भाग निकला।
परिजनों के अनुसार, आकाश की हरकतों और उसकी नीयत की जानकारी पहले से थी। गुंजन के भाई अंश ने बताया कि आरोपी की पत्नी ने भी फोन कर चेतावनी दी थी कि आकाश धारदार हथियार लेकर घूम रहा है और गुंजन पर हमला कर सकता है। आकाश पहले भी धमकियां दे चुका था, लेकिन इसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया।
परिवार की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी गुंजन के कंधों पर थी। अंश ने बताया कि पिता काम नहीं करते थे, मां पहले घरों में काम करती थीं लेकिन कुछ समय से वह भी काम नहीं कर रही थीं। छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है, ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी गुंजन ही निभा रही थी। वह ताऊ के घर रहती थी, जबकि मां और भाई किराए के मकान में रहते थे।
निष्कर्ष:
गुंजन हत्याकांड केवल एक हत्या नहीं, बल्कि समाज की उदासीनता का आईना है। भीड़ की मौजूदगी में भी मदद के लिए आगे न आना, सवाल खड़े करता है कि क्या हम इंसानियत खोते जा रहे हैं। यह घटना चेतावनी है कि अपराध केवल अपराधी नहीं, बल्कि चुप्पी भी करवाती है। अब जरूरत है कि कानून के साथ-साथ समाज भी जिम्मेदारी निभाए, ताकि ऐसी त्रासदियां दोबारा न हों।




