देहरादून | दिनांक: 5 फरवरी 2026
देहरादून के दूल्हा बाजार में दिनदहाड़े हुई गुंजन की नृशंस हत्या ने पुलिस की कार्यप्रणाली और समय पर कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि हत्यारोपी आकाश पिछले दो दिनों से धारदार हथियार लेकर खुलेआम घूम रहा था, जिसकी जानकारी उसकी पत्नी ने पहले ही गुंजन के परिजनों को दे दी थी।
गुंजन के चचेरे भाई अंश ने बताया कि 31 जनवरी को आरोपी आकाश की पत्नी ने फोन कर साफ तौर पर आगाह किया था कि आकाश हथियार लेकर घूम रहा है और गुंजन की जान को खतरा है। इसके बावजूद इस चेतावनी को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसका खामियाजा गुंजन को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
परिजनों के अनुसार, गुंजन की सुरक्षा को लेकर तीन दिन पहले ही खुड़बुड़ा पुलिस चौकी में शिकायत दी गई थी। शिकायत में स्पष्ट रूप से जान को खतरा बताया गया था, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सोमवार को शहर कोतवाली क्षेत्र के दूल्हा बाजार में आकाश ने अचानक गुंजन पर चापड़ से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल गुंजन ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश फैल गया और विरोधस्वरूप दूल्हा बाजार बंद कर दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आकाश पहले भी गुंजन को लगातार परेशान करता था। इसी को लेकर गुंजन ने पूर्व में पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया गया था। इसके बाद भी आकाश ने गुंजन से संपर्क करने की कोशिशें जारी रखीं और कई बार जान से मारने की धमकी दी।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि आकाश ने फिल्मी अंदाज़ में धमकी दी थी कि अगर गुंजन उससे शादी नहीं करेगी तो वह उसे जान से मार देगा। इस धमकी का जिक्र गुंजन के भाई ने पुलिस को दी गई तहरीर में भी किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के निर्देश पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि एसआईटी को हर पहलू से गहन जांच करने और जल्द से जल्द जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के आधार पर सख्त चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
निष्कर्ष:
गुंजन हत्याकांड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चेतावनियों और पूर्व शिकायतों को हल्के में लेना कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है। समय रहते कार्रवाई होती तो शायद एक निर्दोष जान बचाई जा सकती थी। अब यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनशीलता और जवाबदेही की भी परीक्षा बन गया है।


