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उत्तराखंड के 452 मदरसों में बड़ा शैक्षिक सुधार: हजारों बच्चों को मिलेगा मुख्यधारा की शिक्षा का लाभ, लागू होगा उत्तराखंड बोर्ड पाठ्यक्रम

देहरादून | 6 फरवरी 2026

देहरादून।
उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश के 452 पंजीकृत मदरसों में पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं को अब शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद इन मदरसों में उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा, जिससे छात्रों के शैक्षिक प्रमाण पत्र पहली बार सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा के लिए मान्य हो सकेंगे।


अब तक मदरसों से शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद छात्रों को सरकारी भर्तियों और कई शैक्षिक अवसरों से वंचित रहना पड़ता था। कारण यह था कि मुंशी, मौलवी और आलिम जैसे पाठ्यक्रमों को उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं के समकक्ष मान्यता प्राप्त नहीं थी। इस वजह से वर्षों से बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे थे।


43 हजार से अधिक छात्र अब तक रह चुके हैं वंचित
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के मदरसों से अब तक 43,186 से अधिक छात्र-छात्राएं मुंशी, मौलवी, आलिम (अरबी-फारसी), कामिल और फाजिल जैसे पाठ्यक्रम उत्तीर्ण कर चुके हैं। बावजूद इसके, बोर्ड समकक्षता न होने के कारण ये विद्यार्थी अपने शैक्षिक प्रमाण पत्रों का उपयोग सरकारी नौकरी या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में नहीं कर पा रहे थे।


2016 से चल रहा था समकक्षता का संघर्ष
वर्ष 2016 में गठित उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड लंबे समय से उत्तराखंड बोर्ड के समकक्ष मान्यता के लिए प्रयासरत था। मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने बताया कि मान्यता न मिलने के कारण मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे अपने प्रमाण पत्रों का लाभ नहीं उठा पा रहे थे, लेकिन अब उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता मिलने के बाद उनके प्रमाण पत्र पूरी तरह मान्य होंगे।


उत्तराखंड बोर्ड से जुड़ने के लिए पूरे करने होंगे तय मानक


विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, उत्तराखंड बोर्ड से संबद्ध होने के लिए मदरसों को निर्धारित शैक्षिक मानकों को पूरा करना होगा।
प्राथमिक स्तर के मदरसों को प्राथमिक शिक्षा से जुड़े मानक पूरे करने होंगे, जबकि माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई कराने वाले मदरसों को माध्यमिक शिक्षा के मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य होगा।


दोपहर तक सामान्य शिक्षा, उसके बाद धार्मिक अध्ययन
नई व्यवस्था के तहत मदरसों में बच्चे दोपहर तक उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। इसके बाद उन्हें धार्मिक शिक्षा दी जाएगी। धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम क्या होगा, यह निर्णय अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा, ताकि संतुलित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।


निष्कर्ष

उत्तराखंड में मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से जोड़ने का निर्णय हजारों बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने वाला साबित होगा। इससे न केवल उन्हें समान शैक्षिक अवसर मिलेंगे, बल्कि सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा के दरवाजे भी खुलेंगे। यह कदम प्रदेश में समावेशी, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था की ओर एक मजबूत पहल माना जा रहा है।

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