देहरादून | 6 फरवरी 2026
देहरादून।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं, लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस फिलहाल टिकट वितरण को लेकर असमंजस की स्थिति में नजर आ रही है। पार्टी नेतृत्व भले ही कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर भाजपा से मुकाबले का संदेश दे रहा हो, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि कौन नेता किस विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सरकार को घेर रही है। संगठन स्तर पर एकजुटता का प्रदर्शन किया जा रहा है, लेकिन टिकट के सवाल पर कांग्रेस के भीतर ऊहापोह बनी हुई है। कई वरिष्ठ नेताओं की सीटें अब तक तय नहीं हो पाई हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में भी असमंजस का माहौल है।
भाजपा की स्पष्ट रणनीति, कांग्रेस में दुविधा
जहां कांग्रेस टिकट को लेकर माथापच्ची में उलझी है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति के संकेत पहले ही दे दिए हैं। भाजपा नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि मंत्रियों और विधायकों को उनकी मौजूदा सीटों के अलावा किसी दूसरी सीट से टिकट नहीं दिया जाएगा। इस फैसले के जरिए भाजपा ने अपने नेताओं को तय विधानसभा क्षेत्रों में मजबूती से बांधने की रणनीति अपनाई है।
2017 से सत्ता से बाहर, 2027 पर टिकी निगाहें
वर्ष 2017 से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस 2027 के चुनाव में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंकने का दावा कर रही है। पार्टी जनहित के मुद्दों पर आक्रामक दिख रही है, लेकिन टिकट वितरण को लेकर ठोस रणनीति सामने नहीं आ पाई है। नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किस नेता को किस सीट से उतारा जाए, ताकि चुनावी समीकरण अनुकूल बन सकें।
हरक सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष की सीट भी अनिश्चित
कांग्रेस की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और चुनाव प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. हरक सिंह रावत की सीट भी अब तक तय नहीं है। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल स्वयं किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, इस पर भी तस्वीर साफ नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चुनाव न लड़ने का संकेत पहले ही दे दिया है, लेकिन माना जा रहा है कि वे अपने बेटे के लिए टिकट की पैरवी जरूर करेंगे। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उनके लिए कौन सी सीट तय की जाएगी।
घोषणा से बढ़ सकता है अंदरूनी विरोध
कांग्रेस नेतृत्व को यह भी आशंका सता रही है कि यदि समय से पहले सीटों का ऐलान किया गया, तो अन्य दावेदार खुलकर विरोध में उतर सकते हैं। यही कारण है कि पार्टी फिलहाल चुनावी पत्ते खोलने से बच रही है और अंतिम समय तक रणनीति को गोपनीय रखने की कोशिश कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि सभी राजनीतिक दल जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर टिकट का फैसला करते हैं। कांग्रेस भी आने वाले समय में परिस्थितियों और चुनावी गणित के आधार पर यह तय करेगी कि किस नेता को कहां से चुनाव मैदान में उतारा जाए।
निष्कर्ष
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस जहां मुद्दों के मोर्चे पर सक्रिय नजर आ रही है, वहीं टिकट वितरण को लेकर असमंजस उसकी बड़ी कमजोरी बन सकता है। भाजपा की स्पष्ट और अनुशासित रणनीति के मुकाबले कांग्रेस को यदि समय रहते सीटों और चेहरों पर फैसला नहीं लेना पड़ा, तो चुनावी तैयारियों में पिछड़ने का खतरा बना रहेगा।


