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देहरादून में अंकिता न्याय की हुंकार: महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब, माता-पिता और पूर्व सीएम हरीश रावत रहे मौजूद

देहरादून | दिनांक: 8 फरवरी 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय और कथित वीआईपी की भूमिका उजागर करने की मांग को लेकर शनिवार को देहरादून के परेड मैदान में विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर आयोजित इस महापंचायत में विभिन्न सामाजिक संगठनों, महिला संगठनों और आम नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी।


महापंचायत को “अंकिता भंडारी हत्याकांड न्याय यात्रा” का अहम पड़ाव बताया गया। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि जब तक इस जघन्य हत्याकांड में शामिल कथित वीआईपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन और संघर्ष जारी रहेगा।


इस मौके पर अंकिता भंडारी के माता-पिता स्वयं परेड मैदान पहुंचे। उनकी मौजूदगी ने सभा को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया। पीड़ित परिवार ने मंच से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि उन्हें अब भी सच्चाई सामने आने का इंतजार है। महापंचायत में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की उपस्थिति भी चर्चा का केंद्र रही। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।


सभा के दौरान महापंचायत में कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। इन प्रस्तावों के जरिए सरकार और जांच एजेंसियों को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई कि जनता अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी।


महापंचायत में पारित प्रमुख प्रस्ताव

  • यदि पंद्रह दिनों के भीतर पीड़ित परिवार की शिकायत पर ठोस कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती, तो पुनः महापंचायत आयोजित की जाएगी और राष्ट्रपति से मुलाकात की जाएगी।
  • अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा दिया गया शिकायती पत्र ही सीबीआई जांच के लिए आधिकारिक शिकायत माना जाए।
  • मामले में नामजद भाजपा नेता को जांच के दायरे में लाया जाए और पार्टी से निष्कासित किया जाए।

महापंचायत के अंत में आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश की हर बेटी की सुरक्षा और न्याय से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय मिलने तक यह जनआंदोलन लगातार तेज होता रहेगा और सरकार पर दबाव बनाया जाता रहेगा।


निष्कर्ष:
देहरादून की इस महापंचायत ने साफ कर दिया है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जनता का आक्रोश अभी शांत नहीं हुआ है। पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर समाज और संगठनों ने यह संदेश दिया कि न्याय की लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन उसे अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा।

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