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सैन्य सम्मान में विदाई: परीक्षा देकर लौटे बेटे ने दी शहीद सैनिक पिता को मुखाग्नि

देहरादून / हरिद्वार | दिनांक: 8 फरवरी 2026

देश सेवा में तैनात नायक महावीर सिंह रावत को रविवार को गमगीन माहौल में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। हरिद्वार में हुए अंतिम संस्कार के दौरान माहौल भावुक हो उठा, जब पिता के पार्थिव शरीर के सामने बेटे की आंखें छलक पड़ीं। गेट की परीक्षा देने के बाद बेटे गौरव रावत ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।


डिफेंस सिक्योरिटी कोर (डीएससी) में नायक के पद पर तैनात 51 वर्षीय महावीर सिंह रावत, पुत्र स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह रावत, तमिलनाडु के कोयंबटूर में तैनात थे। 5 फरवरी को ड्यूटी के दौरान अचानक हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। इस दुखद समाचार से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।


शनिवार शाम करीब साढ़े छह बजे उनका पार्थिव शरीर इंडिगो विमान से दिल्ली होते हुए देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट लाया गया। देर रात जैसे ही पार्थिव शरीर को कोठारी मोहल्ला, जौलीग्रांट स्थित उनके आवास पर लाया गया, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।


रविवार को सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग सैनिक को श्रद्धांजलि देने उनके आवास पहुंचे। हालांकि, सैनिक के पुत्र गौरव रावत की प्रेमनगर स्थित एक कॉलेज में गेट की परीक्षा निर्धारित थी। परीक्षा के बाद दोपहर करीब 12:30 बजे परीक्षा केंद्र से निकलकर गौरव लगभग दो बजे घर पहुंचे। जैसे ही उन्होंने अपने पिता का पार्थिव शरीर देखा, माहौल पूरी तरह शोकाकुल हो गया।


महावीर सिंह रावत की पत्नी हिमांशी रावत का दुख असहनीय था, वहीं उनकी छोटी बहन मंजू देवी कुछ देर के लिए बेसुध हो गईं। परिवार को ढांढस बंधाने के लिए क्षेत्रीय विधायक बृजभूषण गैरोला और नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र नेगी भी पहुंचे। उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर दिवंगत सैनिक को श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी।


इसके बाद पार्थिव शरीर को हरिद्वार ले जाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने सलामी दी और राष्ट्र सेवा में समर्पित रहे सैनिक को अंतिम विदाई दी गई।


निष्कर्ष:
नायक महावीर सिंह रावत का जीवन देश सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा। बेटे द्वारा परीक्षा देकर लौटकर पिता को मुखाग्नि देना उस संस्कार और समर्पण को दर्शाता है, जो सैनिक परिवारों की पहचान है। उनका जाना परिवार और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी सेवाएं सदैव स्मरणीय रहेंगी।

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