देहरादून | उत्तराखंड
दिनांक: 9 फरवरी 2026
देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का समापन समारोह भावनाओं और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर रहा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी एवं सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी मंच से बोलते हुए भावुक हो गईं। पति मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सास बिशना देवी का उल्लेख करते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े, जिससे पूरा माहौल संवेदनशील और भावनात्मक हो गया।
गीता धामी ने कहा कि जब से उनके पति मुख्यमंत्री बने हैं, तब से उन्होंने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने पूरे प्रदेश को अपना परिवार मान लिया है और व्यक्तिगत जीवन से ऊपर उठकर जनता की सेवा को प्राथमिकता दी है।
“जिन्होंने अपने परिवार के लिए भी समय नहीं निकाला, उनका पूरा परिवार आज उत्तराखंड है,” यह कहते हुए उनका स्वर भर्रा गया।
उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा लागू किए गए नकल विरोधी कानून की सराहना करते हुए कहा कि इस कानून से राज्य के करीब 26 हजार परिवारों के बच्चों को सरकारी नौकरी मिली है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर उत्तराखंड को देशभर में गौरवान्वित करने का कार्य किया गया है।
सीएम धामी बोले— संस्कृति हमारी आत्मा, संरक्षण हमारी जिम्मेदारी
समापन समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि हम अपनी परंपराओं और विरासत को धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं, जबकि इन्हें सहेजना हम सभी का दायित्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे लोकगीत और छोलिया, पांडव, झोड़ा-छपेली जैसे लोकनृत्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा हैं। इनका संरक्षण और अगली पीढ़ी तक हस्तांतरण बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार गुरु-शिष्य परंपरा को बढ़ावा देकर लोक संस्कृति को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
उपलब्धियों से बदली उत्तराखंड की तस्वीर
सीएम धामी ने कहा कि नकारात्मक माहौल के बावजूद उत्तराखंड आज कई क्षेत्रों में अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो रहा है। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में उत्तराखंड ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, वहीं युवाओं को रोजगार देने में भी राज्य अग्रणी बनकर उभरा है।
आधुनिकता के साथ संस्कृति का संरक्षण जरूरी: गीता धामी
गीता धामी ने कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ संस्कृति का संरक्षण बेहद आवश्यक है।
“जब तक संस्कृति जीवित है, तब तक हमारी पहचान और सम्मान है,” उन्होंने कहा। उन्होंने सनातन संस्कृति को विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति बताते हुए उत्तराखंड और भारत पर गर्व व्यक्त किया।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल पद्मभूषण भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राज्य की परंपराओं के प्रति विशेष प्रेम है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति निरंतर देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है।
भाषा बचाने का संकल्प जरूरी: पद्मश्री प्रसून जोशी
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष पद्मश्री प्रसून जोशी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति बांसुरी की तरह है, जिसे सुनने के लिए शांति चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा को बचाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास करने होंगे और उस पर गर्व करना सीखना होगा।
कवि सम्मेलन, लोकगीत और लोकनृत्य बने आकर्षण
महोत्सव के दौरान आयोजित कवि सम्मेलन में समाज, संस्कृति और देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वहीं, इंरर आर्या, बीके सामंत, मनमोहन बटकोरा, रेशमा शाह और अरविंद राणा के लोकगीतों ने देर रात तक समां बांधे रखा।
नशा मुक्ति और गंगा स्वच्छता का संदेश
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक जागरूकता को भी प्रमुखता दी गई। नशा मुक्ति अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम, सीआईएमएस कॉलेज के छात्रों का ड्रग्स अब्यूज पर नुक्कड़ नाटक और मोंटेसरी स्कूल के बच्चों द्वारा ‘रिजर्व गंगा अवतरण’ की प्रस्तुति ने लोगों को गहरा संदेश दिया।
प्रतियोगिताएं और सम्मान समारोह
नींबू सानो प्रतियोगिता में रेखा, प्रियंका बिष्ट और सममणि जोशी ने प्रथम स्थान, तारा देवी, वांदनी और पंकज कुमार ने द्वितीय तथा भूपाल सिंह नेगी व गीता नेगी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इसके अलावा विभिन्न जिलों से आए समाजसेवियों और उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
समारोह में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, विधायक सुरेश गड़िया, उमेश शर्मा काऊ, खजानदास, सुरेश चौहान, भाजपा संगठन महामंत्री अजय कुमार, डीजीपी दीपम सेठ, राज्यसभा सदस्य देवेंद्र सिंह बिष्ट, मधु भट्ट, डॉ. गीता खन्ना सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
निष्कर्ष
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का समापन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और संवेदनाओं का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। गीता धामी की भावुक अपील और मुख्यमंत्री धामी के सांस्कृतिक संरक्षण के संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और जनसेवा की भावना में निहित है।


