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पीएसी में बड़ी प्रशासनिक चूक, अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दो माह तक नहीं पहुंचा मुख्यालय, देर से पहुंचा शासनादेश, पुलिस मुख्यालय ने बैठाई उच्चस्तरीय जांच

देहरादून | उत्तराखंड
दिनांक: 9 फरवरी 2026


उत्तराखंड पुलिस महकमे में एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। 40वीं वाहिनी पीएसी में तैनात दलनायक खजांची लाल की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश जारी होने के बावजूद लगभग दो माह तक पुलिस मुख्यालय नहीं पहुंच सका। इसके चलते संबंधित अधिकारी दिसंबर 2025 के बाद भी सेवा में बना रहा। मामले के उजागर होते ही पुलिस मुख्यालय ने जांच बैठा दी है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में दलनायक खजांची लाल पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद गृह विभाग स्तर पर भी मामले की समीक्षा की गई। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री की स्वीकृति से 16 दिसंबर 2025 को खजांची लाल की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का शासनादेश जारी किया गया।


आमतौर पर ऐसे आदेश कुछ ही दिनों में पुलिस मुख्यालय तक पहुंच जाते हैं, लेकिन इस प्रकरण में यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। आदेश मुख्यालय तक न पहुंचने के कारण संबंधित दलनायक निर्धारित तिथि के बाद भी पद पर कार्य करता रहा, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।


मामले की जानकारी मिलने के बाद 4 फरवरी 2026 को आईजी पीएसी ने शासन की अनुमति से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दोबारा जारी किया। साथ ही, आदेश में देरी के कारणों की जांच के निर्देश दिए गए।


जांच की जिम्मेदारी डीआईजी मुकेश कुमार को
पुलिस मुख्यालय ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच डीआईजी पीएसी मुकेश कुमार को सौंपी है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि शासनादेश समय पर पुलिस मुख्यालय तक क्यों नहीं पहुंचा और इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।


डीजीपी दीपम सेठ ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच अधिकारी को शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक चूक की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


निष्कर्ष

यह मामला न केवल एक अधिकारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़ा है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय पर कार्रवाई होती, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और क्या इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाती है या नहीं।

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