देहरादून, 31 मार्च 2026
उत्तराखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। इस वर्ष प्रदेश में बिजली दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने साफ कर दिया है कि टैरिफ यथावत रहेगा, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
ऊर्जा निगमों की मांग ठुकराई
दरअसल, प्रदेश के तीनों प्रमुख ऊर्जा निगम—उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL), उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) और पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PITCUL) ने इस साल बिजली दरों में 18.50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, नियामक आयोग ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने का फैसला लिया।
प्रेस वार्ता में हुआ ऐलान
नियामक आयोग के अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी ने संयुक्त प्रेस वार्ता में यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
कुछ उपभोक्ता श्रेणियों में बदलाव
हालांकि टैरिफ में वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन कुछ उपभोक्ता श्रेणियों में बदलाव किया गया है। आयोग के अनुसार, प्रीपेड मीटर योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार में 4 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि अन्य उपभोक्ताओं को 3 प्रतिशत की राहत प्रदान की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य डिजिटल भुगतान और स्मार्ट मीटरिंग को बढ़ावा देना है।
घाटे वाले फीडरों पर फोकस
आयोग ने यूपीसीएल को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के 10 सबसे अधिक नुकसान वाले (हाई लॉस) फीडरों की पहचान कर एक विशेष समिति गठित की जाए। यह समिति बिजली चोरी और तकनीकी हानि को कम करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करेगी।
उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता
आयोग का कहना है कि बिजली दरों में वृद्धि न करने का निर्णय प्रदेश की जनता के हित में लिया गया है। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में बेहतर सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड में इस साल बिजली दरों को स्थिर रखने का फैसला आम जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। जहां एक ओर ऊर्जा निगमों की बढ़ोतरी की मांग को नकारा गया, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को छूट और सुविधाएं देकर राहत देने की कोशिश की गई है। अब जरूरत इस बात की है कि बिजली वितरण व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि घाटा कम हो और उपभोक्ताओं को निरंतर बेहतर सेवाएं मिलती रहें।


