नैनीताल, 31 मार्च 2026
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में साइबर ठगों ने एक बार फिर शातिर तरीके से वारदात को अंजाम देते हुए एक रिटायर्ड कुलपति को निशाना बनाया है। गैस बुकिंग के नाम पर झांसा देकर ठगों ने उनसे कुल 1 लाख 91 हजार रुपये की ठगी कर ली। पीड़िता ने मामले की शिकायत मल्लीताल कोतवाली में दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
गैस बुकिंग के दौरान शुरू हुआ पूरा खेल
मल्लीताल के गार्डन हाउस क्षेत्र में रहने वाली पीड़िता, जो उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति रह चुकी हैं, ने 20 मार्च को अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर से गैस बुकिंग करने की कोशिश की। हालांकि तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने पेटीएम के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, जहां उन्हें एक व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध कराया गया।
व्हाट्सएप के जरिए ठगी का जाल
बताए गए नंबर पर संपर्क करने के बाद ठगों ने खुद को कस्टमर सपोर्ट कर्मी बताकर महिला को अपने झांसे में लिया। उन्होंने फोन पर स्क्रीन शेयर करने के लिए कहा और कुछ प्रक्रिया पूरी करवाई। इसी दौरान ठगों ने महिला के बैंक खाते तक पहुंच बना ली।
दो दिन में तीन ट्रांजेक्शन से उड़ाए पैसे
ठगों ने सबसे पहले 84,539 रुपये और फिर 9,999 रुपये मोहम्मद फरहान नामक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर कर लिए। इसके बाद 21 मार्च को दोबारा संपर्क कर महिला को फिर से धोखे में लिया और 96,949 रुपये अंजली नाम के खाते में ट्रांसफर करवा लिए। इस तरह कुल 1.91 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।
मैसेज आने पर हुआ ठगी का एहसास
पीड़िता को इस धोखाधड़ी का पता तब चला, जब उनके मोबाइल पर लगातार बैंक खाते से पैसे कटने के संदेश आने लगे। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद भी उन्हें अज्ञात नंबरों से लगातार कॉल आ रहे हैं, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।
पुलिस ने शुरू की जांच, साइबर सेल भी सक्रिय
मल्लीताल कोतवाली प्रभारी हेम चंद्र पंत ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही साइबर सेल को भी मामले की जानकारी दे दी गई है, ताकि आरोपियों तक जल्द पहुंचा जा सके।
पहले भी बन चुकी हैं ठगी का शिकार
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पीड़िता साइबर ठगों के निशाने पर आई हैं। इससे पहले अगस्त 2025 में भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर उनसे करीब 1.47 करोड़ रुपये की ठगी की जा चुकी है। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
निष्कर्ष:
नैनीताल की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। खासकर स्क्रीन शेयरिंग और फर्जी कस्टमर सपोर्ट के नाम पर हो रही ठगी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहने, अज्ञात नंबरों से सावधान रहने और किसी भी प्रकार की निजी जानकारी या स्क्रीन एक्सेस साझा करने से बचने की सख्त जरूरत है। साथ ही, प्रशासन को भी साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए और अधिक सख्त कदम उठाने होंगे।


