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देहरादून में विवाहित महिला की संदिग्ध मौत, पति और सास समेत पांच पर मुकदमा दर्ज

बसंत विहार थाना क्षेत्र का मामला; मायके पक्ष ने मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए, पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने समेत विभिन्न धाराओं में जांच शुरू की

तारीख: 6 अप्रैल 2026, स्थान: देहरादून, उत्तराखंड

देहरादून की राजधानी से एक संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। बसंत विहार थाना क्षेत्र में एक विवाहित महिला की मौत के बाद उसके मायके पक्ष ने पति और ससुराल के अन्य सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि महिला लंबे समय से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रही थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पति, सास समेत ससुराल पक्ष के कुल पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मृतका की पहचान राजेश्वरी के रूप में हुई है, जो उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (उरेडा) में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं और पौड़ी में तैनात थीं। परिवार के अनुसार, उनकी शादी करीब साढ़े तीन वर्ष पहले 7 दिसंबर 2022 को देहरादून निवासी पीयूष सिंह के साथ हुई थी। शुरुआती समय के बाद से ही वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ने लगा था और ससुराल पक्ष के व्यवहार में लगातार कठोरता आने लगी थी।

मृतका की बड़ी बहन ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि शादी के कुछ समय बाद से ही राजेश्वरी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा था। शिकायत में कहा गया है कि पति, सास, जेठ और जेठानी उसे लगातार ताने देते थे और घरेलू मुद्दों को लेकर उस पर दबाव बनाया जाता था। बहन का यह भी आरोप है कि पति पीयूष कई बार उसके साथ मारपीट करता था और उसे बार-बार तलाक देने की धमकी देता था।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि राजेश्वरी को लगातार डराया-धमकाया जाता था और उसके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता था। मायके पक्ष का कहना है कि इन परिस्थितियों ने उसे मानसिक रूप से बेहद कमजोर कर दिया था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि शादी में दिए गए गहने और अन्य कीमती सामान ससुराल पक्ष ने अपने पास रख लिए थे। जब राजेश्वरी ने अपने गहनों की मांग की, तो उसे साफ मना कर दिया जाता था। आरोप के मुताबिक, पति अक्सर कहता था कि पहले तलाक दो, उसके बाद गहने ले जाना।

मामले का एक और गंभीर पक्ष दंपति की बेटी से जुड़ा है। मृतका की बहन के अनुसार, बच्ची को लेकर भी ससुराल पक्ष की ओर से दबाव बनाया जाता था और उसे नुकसान पहुंचाने तक की धमकी दी जाती थी। परिवार का कहना है कि इसी वजह से राजेश्वरी ने बच्ची को मायके में छोड़ रखा था, जबकि वह स्वयं अपनी नौकरी के कारण पौड़ी में रहती थीं। वह समय-समय पर मायके आकर अपनी बेटी से मिलती थीं।

परिजनों का आरोप है कि जब भी उन्होंने ससुराल पक्ष से बातचीत कर स्थिति सुधारने की कोशिश की, तो उनके साथ भी अभद्रता की गई। गाली-गलौज और धमकियों का सिलसिला जारी रहा, जिससे दोनों परिवारों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया। परिवार का कहना है कि हाल ही में ससुराल पक्ष राजेश्वरी को अपने साथ वापस ले गया था। हालांकि मायके वालों ने उसे जाने से रोका था, लेकिन उसने यह भरोसा दिलाया था कि यदि उसके साथ दोबारा कुछ गलत हुआ, तो वह बच्चों के साथ वापस मायके आ जाएगी।

घटना ने 5 अप्रैल 2026 की सुबह गंभीर मोड़ ले लिया, जब राजेश्वरी के पति ने फोन कर मायके पक्ष को उसकी मौत की सूचना दी। बताया गया कि उसने आत्महत्या कर ली है। हालांकि मायके वालों ने इसे सामान्य आत्महत्या मानने से इनकार किया है और पूरे मामले को सुनियोजित साजिश बताते हुए ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न ने ही इस दुखद घटना को जन्म दिया।

मायके पक्ष की तहरीर के आधार पर थाना बसंत विहार पुलिस ने पति समेत ससुराल पक्ष के पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों में मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी अशोक राठौड़ के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद मामले में विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। पुलिस अब सभी आरोपों, पारिवारिक विवादों, घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

यह मामला एक बार फिर वैवाहिक रिश्तों में उत्पीड़न, मानसिक दबाव और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक प्रश्नों को सामने लाता है। फिलहाल इस प्रकरण में दर्ज आरोप शिकायतकर्ता पक्ष के हैं और पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। जांच की दिशा और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

निष्कर्ष
देहरादून के बसंत विहार क्षेत्र में सामने आया यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और वैवाहिक असुरक्षा के गंभीर आरोपों से जुड़ा संवेदनशील प्रकरण है। मृतका के मायके पक्ष ने पति और ससुरालवालों पर लगातार प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस ने शिकायत के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह आत्महत्या थी या इसके पीछे प्रताड़ना और दबाव की लंबी पृष्ठभूमि थी।

जरूरी सूचना
आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। यदि आप या आपका कोई परिचित भावनात्मक संकट, अवसाद या आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा है, तो तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति, परिवारजन या विशेषज्ञ से संपर्क करें। सहायता के लिए स्नेहा फाउंडेशन की 24×7 हेल्पलाइन 04424640050 और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज हेल्पलाइन 9152987821 पर संपर्क किया जा सकता है।

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