स्थान: रामनगर, नैनीताल (उत्तराखंड)
तारीख: 8 अप्रैल 2026
उत्तराखंड के रामनगर में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में शहर के बुक सेलर्स और स्टेशनरी दुकानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर किताबें और ड्रेस खरीदने के दबाव की शिकायतों की जांच की गई।
जानकारी के अनुसार, नैनीताल जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान की अगुवाई में प्रशासनिक टीम ने शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित किताब और स्टेशनरी की दुकानों का औचक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना था कि कहीं स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या प्रकाशक से किताबें खरीदने के लिए बाध्य तो नहीं कर रहा।
छापेमारी के दौरान तीन प्रमुख बुक सेलर्स की दुकानों की गहन जांच की गई। यहां एनसीईआरटी की पुस्तकों के साथ-साथ निजी प्रकाशकों की किताबें भी उपलब्ध पाई गईं। दुकानदारों का कहना था कि वे स्कूलों द्वारा सुझाई गई सूची के अनुसार ही किताबों का स्टॉक रखते हैं।
हालांकि, मौके पर मौजूद अभिभावकों ने प्रशासन को अलग ही तस्वीर बताई। उनका कहना था कि स्कूलों की ओर से दी जाने वाली पर्चियों में केवल कक्षा का उल्लेख होता है, जबकि किसी विशेष किताब या प्रकाशक का नाम स्पष्ट रूप से नहीं दिया जाता। इससे अभिभावकों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता है और वे महंगी किताबें खरीदने को मजबूर हो जाते हैं।
उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि अब अगला कदम स्कूलों के निरीक्षण का होगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर छात्रों के स्कूल बैग की भी जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तव में कौन-सी किताबें पढ़ाई जा रही हैं और कहीं किसी विशेष प्रकाशक को बढ़ावा तो नहीं दिया जा रहा।
स्कूल ड्रेस के मुद्दे पर भी प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। एसडीएम ने साफ कहा कि ड्रेस के नाम पर ओवररेटिंग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्धारित कीमत से अधिक वसूली करने वाले दुकानदारों और संबंधित संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई से शहर में हड़कंप की स्थिति है और शिक्षा संस्थानों में भी हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर हो रही किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष:
रामनगर में प्रशासन की सख्ती से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि अब शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। अभिभावकों को राहत देने और मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, जिससे शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन और जवाबदेही स्थापित हो सके।


