दिनांक: 9 अप्रैल 2024स्थान: उत्तरकाशी, उत्तराखंड
उत्तरकाशी जिले में केदारनाथ धाम के मुख्य मोक्ष केदार घाट पर एक भयावह दृश्य देखने को मिल रहा है। यहां पर नदी के किनारे अधजले शवों के टुकड़ों को नोचते हुए लावारिस कुत्तों का समूह दिखाई दे रहा है। यह मामला न सिर्फ मानवता को शर्मसार कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है।
गंगा विचार मंच ने इस घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। मंच के प्रांत संयोजक लोकेंद्र बिष्ट ने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद शवों की सही तरीके से सफाई नहीं किए जाने के कारण शव के अवशेष कुत्तों के मुंह में पहुंच रहे हैं। इन कुत्तों के इंसानी मांस का सेवन करने से उनमें मानव रक्त और मांस की गंध लग चुकी है, जिससे वे सड़क पर चलने वालों को भी काट रहे हैं।
बिष्ट ने आगे कहा कि कोविड काल के दौरान भी केदारघाट पर ऐसी ही स्थिति देखी गई थी, जब अंतिम संस्कार के नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो पा रहा था। वर्तमान में भी स्थिति जस की तस है। अक्सर देखा जाता है कि यहां पर बसे कुत्तों का झुंड अधजले शवों के टुकड़ों को खा रहा है। स्थानीय लोग भी अंतिम संस्कार के बाद सफाई में कोताही बरत रहे हैं, जिसके कारण शव के अवशेष कुत्तों के भोजन बन रहे हैं।
इस स्थिति का परिणाम यह है कि अब ये कुत्ते मानव बस्तियों और राहगीरों को भी निशाना बना रहे हैं। बीते दिनों में इसी तरह के एक हादसे में 18 लोगों को कुत्तों ने काट लिया था, जिसमें कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह घटना दर्शाती है कि इन कुत्तों का खतरा बढ़ता ही जा रहा है।
गंगा विचार मंच ने प्रशासन और स्थानीय निकायों से इस दिशा में तुरंत कदम उठाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इन कुत्तों को पकड़कर नियंत्रित करने के साथ ही, शवों की सफाई और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में सुधार आवश्यक है। उन्होंने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे शव का अंतिम संस्कार पूर्ण रूप से करें और सफाई का ध्यान रखें, ताकि इस समस्या का समाधान हो सके।
उत्तरकाशी नगरपालिका की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है। नगरपालिका की ईओ शालिनी चित्रान ने कहा कि यह मामला लोगों की आस्था और भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए प्रयास किया जाएगा कि जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस संबंध में समझाया जाए।
यह घटना हमें इस बात की याद दिलाती है कि धार्मिक आस्थाओं के साथ स्वच्छता और मानवता का भी ध्यान रखना जरूरी है। यदि समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो इन कुत्तों का खतरा बढ़ता ही जाएगा और यह स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। उत्तरकाशी प्रशासन और स्वच्छता विभाग को चाहिए कि वे इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कदम उठाएं ताकि मंदिर, घाट और आसपास के इलाकों में यह समस्या समाप्त हो सके।


