स्थान : माला गांव, यमकेश्वर विकासखंड, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)
दिनांक : 10 जनवरी 2026
यमकेश्वर विकासखंड के माला गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सोशल मीडिया पर बब्बर शेर दिखने का एक वीडियो तेजी से वायरल हो गया। दावा किया गया कि गांव में स्थित पतंजलि के धन्वंतरि धाम परिसर में निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों ने बब्बर शेर को देखा है। वीडियो इतना असली और डरावना लग रहा था कि गांव में दहशत फैल गई और लोग अपने-अपने घरों में कैद हो गए।
वीडियो वायरल होते ही “शेर आया… शेर आया…” की चर्चाएं जंगल से लेकर गांव तक गूंजने लगीं। हालात इतने गंभीर हो गए कि निर्माण कार्य में लगे मजदूरों ने भी डर का हवाला देते हुए कुछ दिनों के लिए घर जाने की बात कह दी। मजेदार बात यह रही कि वीडियो की वास्तविकता पर भरोसा करते हुए खुद ठेकेदार ने भी शेर की मौजूदगी की पुष्टि कर दी, जिसके चलते काम पूरी तरह ठप हो गया।
इधर, सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होते ही वन विभाग की नींद उड़ गई। बब्बर शेर जैसे वन्य जीव का इस इलाके में पाया जाना असंभव माना जाता है, फिर भी एहतियातन लालढांग रेंज और राजाजी टाइगर रिजर्व की टीमें मौके पर भेजी गईं। अधिकारी इस सवाल में उलझे रहे कि आखिर बब्बर शेर धन्वंतरि धाम तक कैसे पहुंच गया।
शनिवार को जांच की सच्चाई सामने आई, जिसने पूरे मामले से पर्दा हटा दिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि न तो कोई शेर आया था और न ही जंगल में कोई हलचल हुई थी। असल में यह पूरा मामला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए फर्जी वीडियो का था, जिसे जानबूझकर वायरल किया गया था।
जांच में सामने आया कि ठेकेदार द्वारा छुट्टी न देने से नाराज एक मजदूर ने एआई की मदद से बब्बर शेर की फोटो और वीडियो तैयार किया और उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। इतना ही नहीं, किसी ने यह वीडियो पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण के सोशल मीडिया अकाउंट तक भी पहुंचा दिया, जिससे मामला और गंभीर हो गया और प्रशासन हरकत में आ गया।
अब स्थिति यह है कि ‘एआई का शेर’ गायब है, गांव में शांति लौट आई है और वन विभाग ने राहत की सांस ली है। यह मामला न सिर्फ अफवाहों की ताकत को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि एआई तकनीक का दुरुपयोग किस तरह डर और भ्रम फैला सकता है।
वन विभाग का बयान:
“मामले की जांच के लिए टीम भेजी गई थी। जांच में पता चला कि काम से छुट्टी न मिलने पर मजदूर ने एआई से फर्जी फोटो और वीडियो बनाकर वायरल किया था।”
— सुधीर कुमार, एसडीओ, लैंसडौन वन प्रभाग
निष्कर्ष:
यह घटना एक चेतावनी है कि डिजिटल और एआई के दौर में फर्जी सूचनाएं कितनी तेजी से दहशत फैला सकती हैं। आज लोग छुट्टी के लिए बीमारी का बहाना नहीं, बल्कि एआई से शेर बना रहे हैं। ऐसे मामलों में सख्त निगरानी और जागरूकता बेहद जरूरी है, ताकि तकनीक का इस्तेमाल सुविधा के लिए हो, भय फैलाने के लिए नहीं।


