देहरादून, 30 जुलाई 2025
राज्य में शराब की ओवररेटिंग पर जिला उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है, जिससे उपभोक्ताओं के अधिकारों को नई मजबूती मिली है। एक ठेका संचालक को सिर्फ 30 रुपये की अवैध वसूली के बदले अब 7,000 रुपये चुकाने होंगे। आयोग ने इसे आर्थिक शोषण और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला?
देहरादून के मियांवाला निवासी अजय कौशिक ने 10 अप्रैल 2021 को रिस्पना पुल के पास स्थित शास्त्रीनगर के एक अंग्रेजी शराब के ठेके से 150 रुपये की कीमत वाला शराब का पव्वा खरीदा था। आरोप है कि सेल्समैन ने एटीएम स्वाइप मशीन के जरिए 180 रुपये काट लिए। जब अजय ने इस पर आपत्ति जताई, तो उनके साथ बदसलूकी की गई और गाली-गलौज तक की नौबत आ गई।
अजय ने पहले जिला आबकारी अधिकारी से शिकायत की, फिर कानूनी नोटिस भेजा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की।
आयोग का फैसला क्या कहता है?
जिला उपभोक्ता आयोग ने उपलब्ध सबूतों और आबकारी विभाग के जवाबों के आधार पर ठेका संचालक बलवंत सिंह बोरा को दोषी माना। आयोग ने स्पष्ट कहा कि एमआरपी से अधिक वसूली उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
निर्णय के अनुसार:
- उपभोक्ता अजय कौशिक को 30 रुपये अतिरिक्त वसूली की राशि लौटानी होगी
- मानसिक उत्पीड़न के लिए 5,000 रुपये हर्जाना
- केस खर्च के लिए 2,000 रुपये का भुगतान
- कुल मिलाकर 7,030 रुपये 45 दिन के भीतर अदा करने होंगे
आबकारी विभाग भी लपेटे में
मामले में आबकारी विभाग को भी पक्षकार बनाया गया था। विभाग के जवाब ने आयोग के निर्णय में अहम भूमिका निभाई। जिला आबकारी अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि एमआरपी से अधिक वसूली पूर्ण रूप से अवैध है। इसके आधार पर आयोग ने विभाग को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में लापरवाह ठेका संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें।
बड़ा संदेश: अब नहीं चलेगी मनमानी
यह फैसला उन शराब उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल बन सकता है, जो अक्सर ठेकों पर एमआरपी से अधिक कीमत चुकाने को मजबूर होते हैं। जबकि राज्य की नई आबकारी नीति में पहले ही कहा गया है कि एमआरपी से अधिक वसूली पर ठेका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, इसके बावजूद कई ठेके मनमानी कर रहे हैं।
क्या करें अगर आपसे भी ओवररेटिंग की गई है?
- रसीद या डिजिटल भुगतान का सबूत रखें
- जिला आबकारी अधिकारी को शिकायत करें
- उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करें
निष्कर्ष:
यह मामला सिर्फ 30 रुपये की वसूली का नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा का है। जिला उपभोक्ता आयोग का यह सख्त रुख अब ठेका मालिकों के लिए एक चेतावनी बन गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।


