स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 14 जुलाई 2025
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन कालनेमि’ अब सिर्फ एक राज्यीय कार्रवाई नहीं, बल्कि देशव्यापी बहस और समर्थन का केंद्र बन चुका है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह मिशन भारत के टॉप ट्रेंड में छाया रहा, जहां हजारों यूजर्स ने सीएम धामी की निडर पहल की सराहना की।
क्या है ऑपरेशन कालनेमि?
मुख्यमंत्री धामी ने पांच दिन पहले एक विशेष अभियान की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य है — उन फर्जी साधु-संतों की पहचान और गिरफ्तारी जो धार्मिक चोला पहनकर उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर ठगी, धोखाधड़ी या अनैतिक गतिविधियों में लिप्त हैं।
इस अभियान को ‘ऑपरेशन कालनेमि’ नाम दिया गया है — रामायण में उल्लेखित एक माया रचने वाले राक्षस ‘कालनेमि’ के नाम पर, जो धर्म की आड़ में अधर्म करता था।
अब तक क्या हुआ?
- राज्यभर में 200 से अधिक फर्जी बाबाओं को हिरासत में लिया जा चुका है।
- इनमें कई साधु-वेशधारी लोग ऐसे निकले जो नशा, ठगी और अश्लील गतिविधियों में लिप्त पाए गए।
- पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब प्रदेश की सीमाओं पर विशेष निगरानी कर रही हैं, ताकि बाहरी तत्व राज्य में प्रवेश न कर सकें।
सोशल मीडिया पर दिखा असर
सोमवार को ट्विटर (अब X) पर #OperationKalnemi ट्रेंड करता रहा।
लोगों ने इसे “सनातन धर्म की रक्षा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम” बताया।
कई यूजर्स ने लिखा:
“सीएम धामी सिर्फ उत्तराखंड नहीं, पूरे देश के लिए धर्मरक्षक बनकर उभरे हैं।”
देशभर से उठी मांग:
मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार व यूपी जैसे राज्यों से भी यूजर्स ने अपनी सरकारों से ‘ऑपरेशन कालनेमि’ जैसा अभियान चलाने की अपील की।
धार्मिक आस्था के दुश्मनों पर सीएम धामी की सीधी चोट
यह कोई पहला मौका नहीं है जब सीएम धामी ने धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सीधा वार किया हो। इससे पहले भी उन्होंने:
- लव जिहाद,
- लैंड जिहाद, और
- धर्मांतरण गैंग्स पर कड़ी कार्रवाई की है।
जनता ने कहा – “धामी है तो मुमकिन है”
उत्तराखंड की जनता और देशभर से आए सनातन प्रेमियों ने मुख्यमंत्री धामी को “सनातन धर्म का प्रहरी” और “श्रद्धा का सच्चा रक्षक” कहा है।
निष्कर्ष:
‘ऑपरेशन कालनेमि’ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब शासन में दृढ़ इच्छाशक्ति और धर्म के प्रति प्रतिबद्धता होती है, तो समाज के भीतर छिपे अधर्मियों को बेनकाब करना संभव होता है। उत्तराखंड से उठी यह लहर अब पूरे भारत में नया संदेश दे रही है — “धार्मिक आस्था के नाम पर पाखंड नहीं चलेगा।”


